FY27 में घरेलू नॉन-फेरस मेटल की मांग में **8-9%** की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कम सप्लाई और मजबूत ग्लोबल कीमतों के बीच दिग्गज कंपनियां अब विस्तार की राह पर हैं।
भारतीय नॉन-फेरस मेटल सेक्टर के लिए FY27 में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। एल्युमिनियम, कॉपर, लेड और जिंक की मांग में सुधार के पीछे ग्लोबल सप्लाई में कमी एक बड़ा कारण है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कीमतों के स्थिर रहने से भारतीय कंपनियों का मार्जिन बेहतर होने की संभावना है।
प्रमुख खिलाड़ियों का प्रदर्शन
Hindustan Zinc अपनी उत्पादन लागत को कंट्रोल में रखकर सिल्वर जैसे बाई-प्रोडक्ट्स से मुनाफा बढ़ाने पर जोर दे रही है। वहीं, Hindalco Industries की सब्सिडियरी Novelis में भी रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। कंपनी FY28 के अंत तक अपनी सालाना लागत में $400 मिलियन की कटौती करने की योजना पर काम कर रही है, जो मार्जिन को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
कैपेक्स और कॉस्ट मैनेजमेंट
फिलहाल ये कंपनियां नई कैपेसिटी बनाने के लिए भारी खर्च कर रही हैं। Hindustan Zinc का 650 किलोटन का स्मेल्टर प्रोजेक्ट इस दिशा में बड़ा कदम है। इसका उद्देश्य साल 2026 तक ग्लोबल एल्युमिनियम मार्केट में आने वाले 1 मिलियन टन के डेफिसिट (Deficit) को पूरा करना है। ऊर्जा लागत की वोलेटिलिटी से बचने के लिए कंपनियां अब कैप्टिव पावर और रिन्यूएबल एनर्जी का सहारा ले रही हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम
हालाँकि आउटलुक पॉजिटिव है, लेकिन निवेशकों को जियोपॉलिटिकल टेंशन और लॉजिस्टिक दिक्कतों पर नजर रखनी चाहिए। चीन के एक्सपोर्ट वॉल्यूम में उतार-चढ़ाव कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनियां अपने बड़े प्रोजेक्ट्स को तय समय सीमा में और बिना बजट बढ़ाए कैसे पूरा करती हैं, क्योंकि देरी से बैलेंस शीट पर दबाव पड़ सकता है।
