ट्रेड समझौते की उम्मीदों के बीच बाज़ार में बुल रन
2026 के फरवरी महीने की शुरुआत भारतीय शेयर बाज़ार के लिए शानदार रही। 3 फरवरी 2026 को बाज़ार खुलते ही ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। बेंचमार्क S&P BSE Sensex में 3,647 अंकों यानी 4.47% का बड़ा उछाल आया। सिर्फ Sensex ही नहीं, बल्कि मेटल्स (धातु) सेक्टर 3.63%, पावर सेक्टर 4.09%, और ऑटो सेक्टर 4.23% जैसे कई प्रमुख सेक्टर्स में भी ज़ोरदार तेज़ी दर्ज की गई। ऐसा लग रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को लेकर जो नए डेवलपमेंट हो रहे हैं, उनसे इकोनॉमी को बूस्ट मिलने की उम्मीद है।
Gokaldas Exports के शेयर में 20% का तूफ़ान
इस तेज़ी के बीच, Gokaldas Exports Ltd. के शेयर रॉकेट की तरह ऊपर भागे। कंपनी के शेयर 20% बढ़कर ₹696.10 के स्तर पर पहुँच गए। इस तूफानी तेज़ी की मुख्य वजह इंडिया-यूएस के बीच ट्रेड डील को लेकर बनी पॉजिटिविटी है। माना जा रहा है कि इस डील से एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियों जैसे Gokaldas Exports को फायदा होगा, क्योंकि इससे बाज़ार तक पहुँच आसान होगी और टैरिफ कम होंगे। Gokaldas Exports अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा विदेशी बाज़ारों से करती है। 31 जनवरी 2026 तक कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब ₹4,468 करोड़ था और इसका P/E रेश्यो 38.18 था। कंपनी अपने तिमाही नतीजे 7 फरवरी 2026 को पेश करने वाली है।
Garware Hi-Tech और Pearl Global भी चमके
सिर्फ Gokaldas Exports ही नहीं, Garware Hi-Tech Films Ltd. और Pearl Global Industries Ltd. के शेयर भी 20% की अपर सर्किट लिमिट को छू गए। Garware Hi-Tech Films के शेयर ₹3,905.20 और Pearl Global Industries के शेयर ₹1,917.35 पर ट्रेड कर रहे थे। इन दोनों कंपनियों की तेज़ी के पीछे कोई खास बड़ी घोषणा नहीं है, बल्कि यह बाज़ार की ओवरऑल पॉजिटिव मोमेंटम और ट्रेडिंग सेंटीमेंट का असर है। Garware Hi-Tech Films का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹7,567 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो करीब 22.26 है, जिसे कुछ जानकारों के अनुसार यह थोड़ा महंगा माना जा रहा है। Pearl Global Industries, जो कि अपैरल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा नाम है और जिसका 64% बिज़नेस यू.एस. मार्केट से जुड़ा है, उसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब ₹8,624 करोड़ और P/E रेश्यो 32.7 है। दोनों ही कंपनियाँ फरवरी की शुरुआत में अपने तिमाही नतीजे जारी करने वाली हैं।
सेक्टरों में तेज़ी और ट्रेड डील का असर
मेटल्स, पावर और ऑटो जैसे सेक्टरों में व्यापक तेज़ी यह दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जो शायद इकोनॉमिक रिफॉर्म्स और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों से जुड़ा है। इंडिया-यूएस ट्रेड डील खासतौर पर भारतीय एक्सपोर्ट्स, खासकर टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर की कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। यह Gokaldas Exports और Pearl Global Industries जैसी कंपनियों के लिए बड़ा बूस्ट होगा, क्योंकि उनका एक्सपोर्ट पर बड़ा फोकस है।
निवेशकों का नज़रिया
फिलहाल, ट्रेड समझौते को लेकर बाज़ार का रिएक्शन काफी पॉजिटिव दिख रहा है, जिससे फॉरेन इन्वेस्टमेंट आने और रुपए को स्टेबिलिटी मिलने की उम्मीद है। ऐसे में निवेशकों की नज़रें अब इस ट्रेड डील के इम्प्लीमेंटेशन डिटेल्स पर टिकी होंगी और आने वाली तिमाहियों में इसका कंपनियों की कमाई और वैल्यूएशन पर क्या असर होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।