इस तूफानी तेजी की मुख्य वजह अमेरिका स्थित ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड निर्माता Graftech का बड़ा ऐलान है। कंपनी ने तत्काल प्रभाव से ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड की कीमतें $600 से $1,200 प्रति मीट्रिक टन तक बढ़ा दी हैं। Graftech ने अस्थिर कीमतों और बढ़ती कच्चे माल की लागत को इसका कारण बताया है। इस कदम के बाद, भारतीय कंपनियों HEG के शेयर 14% चढ़कर ₹571.60 के स्तर पर पहुंच गए, वहीं Graphite India के शेयरों में 10% की तेजी आई और वे ₹654.25 पर बंद हुए।
हालांकि, ये तेजी कितनी टिकाऊ होगी, यह कच्चे माल की कीमतों पर काफी निर्भर करेगा। ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड के उत्पादन में मुख्य रूप से इस्तेमाल होने वाला 'नीडल कोक' (Needle Coke) क्रूड ऑयल से जुड़ा है। जियोपॉलिटिकल तनाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड के दाम 2026 तक $60 से $85 प्रति बैरल के बीच रहने का अनुमान है, जो उत्पादन लागत को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
बाजार विश्लेषकों की मानें तो HEG और Graphite India, अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी Graftech की तुलना में बेहतर वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। HEG का P/E 25-40 की रेंज में है, जबकि Graphite India का P/E 30-34 के आसपास है। वहीं, Graftech का P/E नेगेटिव (-0.67 से -0.73) है। एनालिस्ट्स ने HEG के लिए ₹635-₹705 और Graphite India के लिए ₹835-₹852 के आकर्षक टारगेट प्राइस दिए हैं।
लेकिन, इस उछाल के बीच कुछ बड़े खतरे भी मंडरा रहे हैं। ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड के प्रमुख खरीदार, ग्लोबल स्टील इंडस्ट्री, अभी भी धीमी रिकवरी के दौर से गुजर रही है। चीन की डिमांड में नरमी और ओवरकैपेसिटी की आशंका पर OECD की चेतावनी भी चिंता का विषय है। इसके अलावा, ब्राज़ील द्वारा इंपोर्टेड इलेक्ट्रोड्स पर 'अनुचित कीमतों' को लेकर जांच भी इस सेक्टर की प्राइसिंग सेंसिटिविटी को दर्शाती है।
लंबे समय की बात करें तो, पर्यावरण संबंधी चिंताओं के चलते इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) स्टील मेकिंग को बढ़ावा मिलने से ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। हालांकि, निकट भविष्य का आउटलुक 'सावधानी भरी आशा' (Cautious Optimism) वाला बना हुआ है। एनालिस्ट्स ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन वे मैनेजमेंट से कीमतों और लागत प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। HEG की 85-89% क्षमता उपयोग दर भले ही ऑपरेशनल एफिशिएंसी दिखाती हो, लेकिन पिछले पांच सालों में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ धीमी रही है।