भारत में सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की राह पर Tata Electronics, CG Power, HCL और L&T ने बड़ा कदम उठाया है। इन दिग्गज कंपनियों ने स्थानीय स्तर पर चिप मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइनिंग के लिए **₹4,157 करोड़** का निवेश किया है।
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) के तहत देश की बड़ी कंपनियों ने कमर कस ली है। पिछले 2 फाइनेंशियल ईयर में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, सीजी पावर, एचसीएल ग्रुप और लार्सन एंड टुब्रो ने मिलकर ₹4,157 करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया है। यह ₹1.29 लाख करोड़ के बड़े कमिटमेंट का महज शुरुआती हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत की 95% चिप आयात निर्भरता को कम करना है।
कंपनियों की अलग-अलग रणनीति
- Tata Electronics: कंपनी का फोकस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर है। गुजरात के धोलेरा में फैब्रिकेशन प्लांट और असम में असेंबली यूनिट का काम तेजी से चल रहा है।
- CG Power: यह कंपनी अब प्लानिंग से आगे निकलकर प्रोडक्शन मोड में आ गई है। साणंद स्थित फैसिलिटी से कमर्शियल शिपमेंट की शुरुआत हो चुकी है।
- Larsen & Toubro: एलएंडटी ने चिप डिजाइनिंग पर दांव लगाया है। अपनी सब्सिडियरी LTSCT में ₹812 करोड़ का निवेश किया है, जिसका लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2031 तक ₹5,000 करोड़ का डिजाइन रेवेन्यू हासिल करना है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks)
इस सेक्टर में निवेश तो बड़ा है, लेकिन निवेशकों को कुछ सावधानियां भी बरतनी होंगी:
- हाई कॉस्ट और डेट: चिप प्लांट बनाना बेहद खर्चीला काम है, जिससे कंपनियों के डेट लेवल और कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है।
- एग्जीक्यूशन रिस्क: ये बड़े प्रोजेक्ट्स हैं, जिनमें तकनीकी देरी या लागत बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है।
- सरकारी सपोर्ट: इन प्रोजेक्ट्स की सफलता सरकार की इंसेंटिव पॉलिसीज पर काफी हद तक निर्भर है।
भारत की सेमीकंडक्टर खपत 2031 तक $155 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो एक बड़ा मार्केट अवसर पैदा करता है। हालांकि, शेयरधारकों के लिए इन कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और कर्ज के प्रबंधन पर नजर रखना जरूरी होगा।
