मानसून की बारिश के कारण देश भर में निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं, जिससे सीमेंट की कीमतें **₹349** प्रति बैग पर अटकी हुई हैं। कमजोर मांग और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियां कीमतें बढ़ाने में नाकाम साबित हो रही हैं।
देश भर में मानसून के असर से निर्माण गतिविधियों में सुस्ती छाई हुई है, जिसका सीधा असर सीमेंट मार्केट पर दिख रहा है। हालांकि मैन्युफैक्चरर्स ने अलग-अलग मार्केट्स में कीमतें ₹10 प्रति बैग बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन कमजोर मांग और बायर सेंटीमेंट के चलते यह कोशिश कामयाब नहीं हो सकी।
मार्जिन पर दबाव और बढ़ती लागत
सीमेंट कंपनियों के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती कॉस्ट प्रेशर की है। पेटकोक और इम्पोर्टेड कोल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जिसका असर प्रोडक्शन लागत पर पड़ रहा है। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण फ्यूल के दाम महंगे बने हुए हैं। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इसका सीधा असर ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ेगा और फाइनेंशियल ईयर 2027 में इसमें 1.5% से 2.5% तक की गिरावट देखी जा सकती है।
क्षेत्रीय मांग का हाल
देश के पूर्वी हिस्सों में भारी बारिश के कारण कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं, जिससे बिक्री पर असर पड़ा है। वहीं, पश्चिमी भारत में स्थितियां थोड़ी बेहतर हैं, जो वॉल्यूम ग्रोथ को सहारा दे रही हैं। जुलाई 2026 में इंडस्ट्री ने 13.1% की सालाना वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की थी, लेकिन अब अनुमान है कि फुल-ईयर ग्रोथ 6% से 7% के बीच सिमट सकती है।
भविष्य की राह
इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि कंपनियां चाहकर भी कीमतें नहीं बढ़ा पा रही हैं। फिलहाल सारा ध्यान मार्केट शेयर बचाने पर है। अब बाजार की नजरें मानसून के बाद की रिकवरी पर टिकी हैं। फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद है, जिसके बाद ही कंपनियों की प्राइसिंग पावर और मार्जिन में सुधार के आसार बनेंगे।
