India South Korea Tech Deal: भारत की 'मेक इन इंडिया' को बूस्ट! दक्षिण कोरिया के साथ हुआ बड़ा टेक समझौता

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AuthorAditya Rao|Published at:
India South Korea Tech Deal: भारत की 'मेक इन इंडिया' को बूस्ट! दक्षिण कोरिया के साथ हुआ बड़ा टेक समझौता
Overview

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-मायुंग की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच तकनीकी और रणनीतिक सहयोग में बड़ा उछाल आया है। इस डील के तहत सेमीकंडक्टर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी जैसे अहम सेक्टर में साझेदारी को मजबूत किया गया है, जिसका मकसद ग्लोबल सप्लाई चेन को और भी ज्यादा रेसिलिएंट (Resilient) बनाना है।

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वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-मायुंग की भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई ऊंचाई दी है। 2015 में शुरू हुई 'स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' को और गहरा किया गया है। राष्ट्रपति ली ने कहा कि भारत अब सिर्फ एक बड़ा कंज्यूमर मार्केट नहीं, बल्कि ग्लोबल प्रोडक्शन और सप्लाई चेन का एक अहम हब बनता जा रहा है। आठ साल से अधिक समय बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का यह पहला भारत दौरा है, जिसका मकसद आपसी विकास और सुरक्षा के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार करना है। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जो मौजूदा 26.89 अरब डॉलर (FY25) से काफी ज्यादा है।

खास सेक्टर: सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस

सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में दक्षिण कोरिया, जो Samsung और SK Hynix जैसी दिग्गजों का घर है, भारत को 2030 तक ग्लोबल हब बनने में मदद करेगा। भारत के 'सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) और इंसेंटिव्स का लक्ष्य निवेश आकर्षित करना और पूरी सप्लाई चेन बनाना है। दक्षिण कोरिया की 'K-Semiconductor Belt' पहल भी इसी महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। इसमें AI चिप्स और 3D पैकेजिंग पर ज्वाइंट R&D भी शामिल है, ताकि चीन पर निर्भरता कम की जा सके।

भारत के रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) लक्ष्यों और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के साथ दक्षिण कोरिया की सोलर, विंड और एनर्जी स्टोरेज में महारत मेल खाती है। इससे ज्वाइंट वेंचर्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मौके खुलेंगे, जिससे भारत की एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) को गति मिलेगी।

डिफेंस सेक्टर में भी बड़े पैमाने पर सहयोग हो रहा है। दक्षिण कोरिया भारत का पांचवां सबसे बड़ा पारंपरिक हथियारों का निर्यातक है। K9 Vajra हॉवित्ज़र जैसी परियोजनाओं में 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत 60% से अधिक स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग के साथ सफल को-प्रोडक्शन देखा गया है। दोनों देश डिफेंस इक्विपमेंट के ज्वाइंट टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर भी विचार कर रहे हैं। शिपबिल्डिंग (Shipbuilding) में सहयोग भी एक प्राथमिकता है, जिसके लिए दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञता का लाभ उठाया जाएगा।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा

2010 में साइन किए गए कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) ने व्यापार विस्तार की नींव रखी है। द्विपक्षीय व्यापार 2021 में 23.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। दक्षिण कोरियाई निवेश भी भारत में काफी है; अप्रैल 2000 से जून 2025 तक 600 से अधिक फर्मों ने लगभग 6.8 अरब डॉलर का FDI (Foreign Direct Investment) किया है। Samsung, Hyundai और LG जैसी बड़ी कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग बेस स्थापित कर चुकी हैं। इंडिया-कोरिया इलेक्ट्रॉनिक ओरिजिन डेटा एक्सचेंज सिस्टम (EODES) CEPA के तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप से ओरिजिन डेटा का आदान-प्रदान करके व्यापार को सुव्यवस्थित करने का लक्ष्य रखता है।

भू-राजनीतिक लक्ष्य और सप्लाई चेन रणनीति

यह साझेदारी वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों, जैसे अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का जवाब है, जिसने सप्लाई चेन की कमजोरियों को उजागर किया है। दोनों देश अपनी निर्भरता में विविधता लाना चाहते हैं, खासकर क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) और सेमीकंडक्टर के लिए, जहां एक ही भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भरता रणनीतिक जोखिम पैदा करती है। भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भूमिका दक्षिण कोरिया की 'न्यू सदर्न पॉलिसी' के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य चीन पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। यह रणनीतिक तालमेल दोनों देशों के लिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नीतिगत स्वायत्तता और प्रभाव को बढ़ाएगा।

चुनौतियां और संभावित बाधाएं

रणनीतिक संरेखण के बावजूद, महत्वपूर्ण निष्पादन बाधाएं बनी हुई हैं। हाई-टेक सेक्टर में रेगुलेटरी अड़चनें और समन्वय की कमी प्रगति को धीमा कर सकती है। जहां दक्षिण कोरिया मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी है, वहीं भारत अभी भी अपने एडवांस्ड सेक्टर इकोसिस्टम विकसित कर रहा है और उसे प्रतिभा की कमी व सेमीकंडक्टर लक्ष्यों में प्रोजेक्ट देरी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दक्षिण कोरिया की निर्यात-निर्भर अर्थव्यवस्था वैश्विक मंदी और व्यापार नीति में बदलावों के प्रति संवेदनशील है। भारत को दक्षिण कोरिया के साथ बड़े व्यापार घाटे का सामना करना पड़ता है, और रक्षा सेमीकंडक्टर के लिए गैलियम जैसे आयातित कच्चे माल पर भारत की निर्भरता एक रणनीतिक चिंता है। विभिन्न भू-राजनीतिक रुख, जैसे कि दक्षिण कोरिया के अमेरिका के साथ संबंध बनाम भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, एक जटिल संतुलन का कार्य प्रस्तुत करते हैं।

आगे की राह

भारत-दक्षिण कोरिया की बढ़ी हुई रणनीतिक साझेदारी से महत्वपूर्ण आर्थिक विकास और तकनीकी उन्नति की उम्मीद है। सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और शिपबिल्डिंग पर निरंतर फोकस, सरकारी समर्थन के साथ, गहरी वैल्यू चेन इंटीग्रेशन को बढ़ावा देगा। चुनौतियों का सामना करके और अपनी ताकत का लाभ उठाकर, भारत और दक्षिण कोरिया एक गतिशील अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में रेसिलिएंट ग्लोबल सप्लाई चेन और इनोवेशन के लिए महत्वपूर्ण आधारशिला के रूप में खुद को स्थापित कर रहे हैं।

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