कानूनी अड़चनें दूर, निवेश का रास्ता साफ
भारत के पास रेयर अर्थ (Rare Earths) के बड़े भंडार हैं, खासकर मोनाज़ाइट (Monazite)। लेकिन, एटॉमिक एनर्जी एक्ट, 1962 के तहत मोनाज़ाइट को 'प्रिस्क्राइब्ड सब्सटेंस' (Prescribed Substance) माना जाता है, जिसने प्राइवेट सेक्टर की एंट्री को मुश्किल बना रखा था। बजट 2026-27 इस स्थिति को बदलने का वादा करता है। फुल डीरेग्युलेशन (Deregulation) की बजाय, सरकार मोनाज़ाइट और संबंधित प्रोसेसिंग इक्विपमेंट (Processing Equipment) के इम्पोर्ट पर कस्टम ड्यूटी में छूट (Customs Duty Exemptions) देगी। इसके साथ ही, माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट के तहत कॉरिडोर डेवलपमेंट को इंटीग्रेट (Integrate) किया जाएगा। इससे प्राइवेट और ज्वाइंट-वेंचर (Joint Venture) कंपनियां तय ज़ोन में काम कर सकेंगी, और न्यूक्लियर सेफ्टी (Nuclear Safety) भी बनी रहेगी।
वैल्यू चेन को मिलेगा बूस्ट, बड़े इंसेंटिव्स का ऐलान
इस नई पॉलिसी का मकसद रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) की पूरी वैल्यू चेन (Value Chain) को मज़बूत करना है। इससे भारत की इंडस्ट्रियल कैपेसिटी (Industrial Capacity) बढ़ेगी, खासकर परमानेंट मैग्नेट (Permanent Magnets) बनाने में। इसमें अयस्कों (Ores) को अलग-अलग रेयर-अर्थ ऑक्साइड (Rare-earth Oxides) में प्रोसेस करना, हाई-प्योरिटी मैटेरियल (High-Purity Materials) बनाना और मैग्नेट जैसे कंपोनेंट्स का प्रोडक्शन शामिल है। सरकार ₹7,280 करोड़ की एक स्कीम के ज़रिए परमानेंट मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग (REPM Manufacturing) को बढ़ावा देगी, जिससे 6,000 MTPA की क्षमता खड़ी की जा सके। इन इंसेंटिव्स को प्रोडक्शन से जोड़ा जाएगा, जिससे निवेशकों का रिस्क कम होगा। इसके अलावा, ई-वेस्ट (E-waste) से रीसाइक्लिंग (Recycling) के लिए ₹1,500 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम भी है, जो ESG गोल्स (ESG Goals) को भी पूरा करेगी।
निवेशकों के लिए नए मौके, स्ट्रैटेजिक प्ले
यह कॉरिडोर स्ट्रैटेजी (Corridor Strategy) निवेशकों को ज़्यादा सुरक्षित माहौल देगी। मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग (Magnet Manufacturing) में सबसे कम एंट्री बैरियर (Entry Barrier) हैं, जहाँ स्पष्ट इंसेंटिव्स और सात साल का आउटलुक है। प्रोसेसिंग और सेपरेशन (Processing and Separation) सेगमेंट में एंट्री थोड़ी मुश्किल होगी, लेकिन यहाँ ड्यूटी एग्ज़ेम्प्शन (Duty Exemptions) और बनी-बनाई इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) के साथ बड़े स्ट्रैटेजिक फायदे मिलेंगे। निवेशक पब्लिक सेक्टर कंपनियों (Public Sector Companies) या अनुभवी फॉरेन पार्टनर्स (Foreign Partners) के साथ ज्वाइंट-वेंचर (Joint Venture) बनाकर टेक्निकल (Technical) और लीगल (Legal) चुनौतियों से निपट सकते हैं।
चीन को टक्कर देने की तैयारी, सप्लाई चेन में भारत की पैठ
यह कदम भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) में चीन के एकाधिकार को चुनौती देने का मौका देगा। अपनी वैल्यू चेन को विकसित करके, भारत लॉजिस्टिक्स कॉस्ट (Logistics Cost) कम करने और अप्रूवल (Approvals) को तेज़ करने का लक्ष्य रखता है। भारत के पास मोनाज़ाइट के विशाल रिजर्व्स (Reserves) हैं, जिनसे लाखों टन रेयर अर्थ ऑक्साइड निकाले जा सकते हैं। हालांकि, इस राह में एनवायरमेंटल लॉ सूट (Environmental Lawsuits), रिलायंस ऑन फॉरेन टेक्नोलॉजी (Reliance on Foreign Technology) और कंसिस्टेंट गवर्नमेंट पॉलिसी (Consistent Government Policy) जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना होगा।