India-US Aviation Deal: भारतीय सप्लायर्स की चमकी किस्मत! US बाज़ार में मिली ज़ीरो-ड्यूटी एंट्री

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
India-US Aviation Deal: भारतीय सप्लायर्स की चमकी किस्मत! US बाज़ार में मिली ज़ीरो-ड्यूटी एंट्री
Overview

भारत और अमेरिका के बीच हुए एक अहम व्यापार समझौते (Trade Deal) से भारतीय एविएशन कंपोनेंट्स (Aviation Components) सप्लायर्स के लिए अमेरिकी बाज़ार के दरवाज़े खुल गए हैं। इस डील के तहत, भारतीय सप्लायर्स को अब अमेरिकी बाज़ार में बिना किसी ड्यूटी के अपने प्रोडक्ट्स बेचने का मौका मिलेगा, जिससे उनके एक्सपोर्ट्स (Exports) में ज़बरदस्त उछाल आने की उम्मीद है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

ज़ीरो-ड्यूटी एक्सेस से एक्सपोर्ट्स को मिलेगी रफ़्तार

इस ऐतिहासिक इंडो-यूएस व्यापार समझौते (Indo-US Trade Agreement) ने भारत को ग्लोबल एयरोस्पेस (Aerospace) सप्लाई चेन में एक मजबूत खिलाड़ी बनाने की ओर बड़ा कदम बढ़ाया है। अमेरिकी बाज़ार में ज़ीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलने से भारतीय कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स (Component Manufacturers) को यूरोपीय, जापानी और कोरियाई देशों के मुकाबले बड़ा कॉम्पिटिटिव एज (Competitive Edge) मिलेगा। अनुमान है कि इससे भारत के सालाना एयरोस्पेस एक्सपोर्ट्स में 'एक्सपोनेंशियल' (Exponential) बढ़ोतरी होगी। फिलहाल, एयरबस (Airbus) के लिए भारत का एक्सपोर्ट करीब $1.5 बिलियन और बोइंग (Boeing) के लिए $1.25 बिलियन है।

Boeing दोगुना करेगा सोर्सिंग, एयरलाइंस के बड़े ऑर्डर्स बने वजह

अमेरिकन एयरोस्पेस दिग्गज बोइंग (Boeing) ने भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की मंशा जताई है। कंपनी ने भारतीय सप्लायर्स से कंपोनेंट्स की सोर्सिंग (Sourcing) को दोगुना करने की योजना बनाई है। इस फैसले के पीछे भारतीय एयरलाइंस द्वारा दिए गए बड़े विमानों के ऑर्डर हैं। एयर इंडिया ग्रुप (Air India Group) और अकासा (Akasa) जैसी कंपनियों ने मिलकर $50 बिलियन से ज़्यादा के ऑर्डर दिए हैं, जिनमें सैकड़ों विमान शामिल हैं। बोइंग को उम्मीद है कि आने वाले समय में भारत से कंपनी को और भी अरबों डॉलर के ऑर्डर मिल सकते हैं। वहीं, इंडिगो (IndiGo) भी बड़े वाइड-बॉडी (Wide-body) विमान खरीदने पर विचार कर रही है।

टैरिफ में बड़ी राहत और 'मेक इन इंडिया' को बूस्ट

कंपोनेंट्स पर ज़ीरो-ड्यूटी एक्सेस के अलावा, इस डील से एयरोस्पेस पार्ट्स पर लगने वाले टैरिफ (Tariff) में भी बड़ी राहत मिली है। एयरोस्पेस पार्ट्स पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। यह भारतीय एयरोस्पेस सप्लाई चेन के लिए एक बड़ी बढ़त साबित होगी। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर (Commerce and Industry Minister) पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने विश्वास जताया है कि भारत जल्द ही दुनिया के सबसे बड़े फॉरेन कंपोनेंट सप्लायर्स (Foreign Component Suppliers) में शुमार होगा। यह सरकार की 'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल को और मज़बूत करेगा, क्योंकि इससे देश से सोर्सिंग को बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का अनुमान है कि भारतीय एयरलाइंस कुल मिलाकर विमानों, इंजनों और स्पेयर पार्ट्स (Spares) के लिए $70-80 बिलियन के ऑर्डर दे सकती हैं, जिससे यह मैन्युफैक्चरिंग टाइज़ (Manufacturing Ties) और भी मज़बूत होंगे।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.