वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की स्टील क्षमता को 2047 तक **604 मिलियन टन** तक ले जाने का रोडमैप पेश किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना में डिकार्बोनाइजेशन और स्पेशलिटी स्टील पर जोर दिया गया है, हालांकि **92%** कोकिंग कोल आयात पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घरेलू स्टील सेक्टर के लिए एक स्पष्ट दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया है, जिसका लक्ष्य साल 2047 तक कच्चे स्टील की उत्पादन क्षमता को 604 मिलियन टन तक पहुँचाना है। 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 'वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन' की जनरल असेंबली को संबोधित करते हुए उन्होंने उद्योग के आधुनिकीकरण के लिए पांच-सूत्रीय रणनीति साझा की। इस योजना में डिकार्बोनाइजेशन, हाई-वैल्यू स्पेशलिटी स्टील और आयात पर निर्भरता कम करने को प्राथमिकता दी गई है।
खपत में बढ़ोतरी के अवसर
सरकार का यह विस्तार भारत की प्रति व्यक्ति स्टील खपत और वैश्विक औसत के बीच के अंतर को पाटने के लिए है। भारत में अभी प्रति व्यक्ति स्टील खपत लगभग 109 किलोग्राम है, जो 209 किलोग्राम के वैश्विक औसत से काफी कम है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार चालू फाइनेंशियल ईयर में ₹12.2 लाख करोड़ का भारी-भरकम पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर कर रही है।
ग्रीन स्टील और सरकारी इंसेंटिव
स्पेशलिटी स्टील के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ₹6,300 करोड़ के आउटले वाली 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) स्कीम चला रही है। हालांकि, राह आसान नहीं है। वैश्विक स्तर पर 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' के दबाव के कारण भारतीय कंपनियों को अपने उत्सर्जन को कम करना होगा। ग्रीन स्टील के लिए हाइड्रोजन-आधारित उत्पादन तकनीक अभी काफी महंगी है और इसे बड़े स्तर पर अपनाने के लिए तकनीकी सहायता की जरूरत है।
कच्चे माल की चुनौती
पर्यावरण के लक्ष्यों से इतर, सेक्टर के सामने सप्लाई चेन की बड़ी समस्या है। भारतीय स्टील निर्माता अपनी जरूरत का 92% कोकिंग कोल विदेशों से आयात करते हैं, जिससे वे ग्लोबल प्राइस वोलाटिलिटी के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। 'नेशनल स्टील पॉलिसी विजन 2047' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कैसे कोकिंग कोल की निर्भरता को कम करती हैं और प्रॉफिट मार्जिन को स्थिर बनाए रखती हैं।
