Steel Sector: 2047 तक भारत की स्टील क्षमता होगी 604 मिलियन टन, जानें निवेशकों के लिए क्या है बड़ा रिस्क

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Steel Sector: 2047 तक भारत की स्टील क्षमता होगी 604 मिलियन टन, जानें निवेशकों के लिए क्या है बड़ा रिस्क

सरकार ने स्टील सेक्टर के लिए एक महत्वाकांक्षी ड्राफ्ट पॉलिसी पेश की है, जिसके तहत 2047 तक भारत की क्रूड स्टील क्षमता को तीन गुना बढ़ाकर **604 मिलियन टन** करने का लक्ष्य रखा गया है।

लक्ष्य और रणनीति

भारत सरकार ने अगले दो दशकों के लिए स्टील प्रोडक्शन को लेकर एक बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार किया है। मौजूदा 220 मिलियन टन की क्षमता को बढ़ाकर 604 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि देश की इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

सस्टेनेबिलिटी पर फोकस

इस योजना में पर्यावरण का भी पूरा ख्याल रखा गया है। सरकार का लक्ष्य कार्बन एमिशन को मौजूदा 2.54 टन से घटाकर 1.54 टन (प्रति टन क्रूड स्टील) तक लाने का है। इस लक्ष्य को पाने के लिए कंपनियों को नई और महंगी ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनानी होगी, जिसका असर सीधे उनकी लागत पर पड़ सकता है।

कच्चे माल की चुनौती

इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए भारी मात्रा में कच्चे माल की जरूरत होगी। अनुमान है कि तब तक हर साल 772 मिलियन टन आयरन ओर और 236 मिलियन टन कोकिंग कोल की आवश्यकता होगी। कोकिंग कोल के लिए भारत की 92 फीसदी निर्भरता आयात पर है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव के कारण बड़ा जोखिम पैदा करती है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

निवेशकों को दो मोर्चों पर सावधान रहने की जरूरत है:

  1. Debt Pressure: नई क्षमता बनाने के लिए कंपनियों का खर्च बढ़ेगा, जिससे फाइनेंशियल ईयर 2027 तक इंडस्ट्री का कर्ज और ऑपरेटिंग प्रॉफिट का रेशियो 3.0 गुना तक बढ़ सकता है।
  2. CBAM टैक्स: कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे नए नियमों से एक्सपोर्ट की लागत बढ़ सकती है, जो मुनाफे पर दबाव डाल सकती है।

अब निवेशकों को कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान और कर्ज कम करने की रणनीति पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.