सरकार ने साल 2047 तक स्टील प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाकर **600 मिलियन मीट्रिक टन** तक पहुंचाने की तैयारी कर ली है। नई पॉलिसी का मकसद सस्ते इंपोर्ट पर लगाम लगाना और देश में 'स्पेशलिटी स्टील' के प्रोडक्शन को बढ़ावा देना है।
नई पॉलिसी की रूपरेखा
भारत सरकार अपनी पुरानी 2017 की नेशनल स्टील पॉलिसी को बदलकर अब एक नया फ्रेमवर्क लाने की तैयारी में है। स्टील सेक्रेटरी संदीप पौंड्रिक ने साफ किया है कि इस पॉलिसी को जल्द ही पब्लिक कंसल्टेशन के लिए पेश किया जाएगा। इसका मुख्य विजन साल 2047 तक देश को स्टील प्रोडक्शन में ग्लोबल लीडर बनाना है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
इन्वेस्टर्स के लिए इस पॉलिसी का सबसे बड़ा अपडेट 'ट्रेड प्रोटेक्शन' है। सरकार एंटी-डंपिंग और सेफगार्ड ड्यूटी के जरिए विदेशी सस्ते और खराब क्वालिटी के स्टील पर लगाम लगाएगी। इससे Tata Steel, JSW Steel और SAIL जैसी घरेलू कंपनियों के मार्जिन पर पड़ने वाला दबाव कम होगा। सरकार का जोर अब केवल कमोडिटी-ग्रेड स्टील नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू 'स्पेशलिटी स्टील' पर है।
सेक्टर के सामने चुनौतियां
स्टील सेक्टर काफी कैपिटल-इंटेंसिव है। 600 मिलियन टन के टारगेट तक पहुंचने के लिए कंपनियों को भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर करना होगा, जिससे डेट लेवल बढ़ सकता है। साथ ही, यह इंडस्ट्री ग्लोबल डिमांड और कच्चे माल जैसे आयरन ओर और कोकिंग कोल की कीमतों के प्रति काफी सेंसिटिव है। इसके अलावा, सस्टेनेबल प्रोडक्शन के लिए सरकार एक नए स्टील स्क्रैपिंग फ्रेमवर्क पर भी काम कर रही है, जिस पर निवेशकों की नजर होनी चाहिए।
