तेल की बर्बादी में छुपा बड़ा खजाना
भारत ने यूज्ड कुकिंग ऑयल (UCO) के रूप में एक महत्वपूर्ण, अप्रयुक्त संसाधन का पता लगाया है, जो ऊर्जा और केमिकल उद्योगों को भारी मात्रा में आपूर्ति कर सकता है। इसका पैमाना काफी बड़ा है, 2024-25 में सालाना इस्तेमाल होने वाले 27.82 मिलियन टन एडिबल ऑयल में से लगभग 3.7 मिलियन टन UCO के बरामद होने की उम्मीद है।
कलेक्शन में बड़ी चुनौतियां
इतनी बड़ी उपलब्धता के बावजूद, वर्तमान में इस UCO का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही इकट्ठा किया जा रहा है। अलग-अलग बिखरे हुए एग्रीगेशन सिस्टम (aggregation systems) एक बड़ी बाधा पेश करते हैं। भारत का अधिकांश UCO या तो गलत तरीके से फेंका जा रहा है या खाद्य श्रृंखला में वापस भेजा जा रहा है, भले ही सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए टोटल पोलर कंपाउंड (total polar compounds) को 25% तक सीमित करने के नियम हों। यहां तक कि बायोडीजल उत्पादन जैसे औपचारिक माध्यमों में भी सप्लाई चेन कमजोर और बिखरी हुई है, और कई प्लांट के पास एग्रीगेटर (aggregators) के साथ औपचारिक लिंक नहीं हैं।
औद्योगिक उपयोग में विविधता
रिपोर्ट का तर्क है कि UCO का उपयोग केवल बायोडीजल तक सीमित रखना, जिसकी मांग वर्तमान में सालाना केवल लगभग 55,000 टन है, इसकी क्षमता को कम आंकना है। सर्फेक्टेंट मार्केट, जिसका अनुमान $2-3 अरब है, यदि यह बायो-आधारित इनपुट (bio-based inputs) में बदलता है, तो सालाना 2 मिलियन टन UCO की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) की ओर बढ़ता कदम एक और बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है, जिसमें 2027 तक केवल 1% की ब्लेंडिंग का लक्ष्य भी सालाना 0.20 मिलियन टन UCO की मांग पैदा कर सकता है।
आगे का रास्ता
यूज़्ड कुकिंग ऑयल को भारत के स्थिरता लक्ष्यों के लिए एक "रणनीतिक सर्कुलर-कार्बन संसाधन" (strategic circular-carbon resource) मानना एक व्यावहारिक विकल्प है। केमिकल उत्पादन में UCO को एकीकृत करना मौजूदा औद्योगिक क्षमताओं के साथ संभव है। हालांकि, इसे हासिल करने के लिए स्केल (scale), आपूर्ति की निरंतरता (consistency of supply) और ट्रेसिबिलिटी (traceability) जैसी चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है। कलेक्शन नेटवर्क को मजबूत करना, एग्रीगेशन को प्रोत्साहित करना और नीति व इंडस्ट्री समन्वय के माध्यम से ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित करना, इस प्रचुर मात्रा में मौजूद वेस्ट स्ट्रीम (waste stream) से जलवायु और वाणिज्यिक दोनों लाभों को अनलॉक करने के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।
