SAIL, NMDC: सरकारी स्टील कंपनियों का बड़ा प्लान! इंफ्रा को मिलेगा बूस्ट, कैपेक्स में **44%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी

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AuthorAditya Rao|Published at:
SAIL, NMDC: सरकारी स्टील कंपनियों का बड़ा प्लान! इंफ्रा को मिलेगा बूस्ट, कैपेक्स में **44%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी
Overview

भारत की सरकारी स्टील कंपनियों ने आने वाले फाइनेंशियल ईयर (FY27) के लिए अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) को ज़बरदस्त **44%** तक बढ़ाने का फैसला किया है। कुल खर्च **₹25,125 करोड़** तक पहुंचने का अनुमान है। इस बड़े निवेश की अगुआई Steel Authority of India Limited (SAIL) और National Mineral Development Corporation (NMDC) जैसी दिग्गज कंपनियां कर रही हैं।

इंफ्रा पर सरकार का दांव, स्टील कंपनियों का बड़ा निवेश!

यह बड़ा निवेश भारत की महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं और इकोनॉमी में संभावित रिकवरी को देखते हुए किया जा रहा है। स्टील सेक्टर, जो राष्ट्रीय विकास के लिए बेहद अहम है, के 2026 से 2031 तक 9.08% की CAGR से बढ़ने का अनुमान है। भारत का लक्ष्य 2030-31 तक 300 मिलियन टन प्रति वर्ष (mtpa) क्षमता हासिल करना है। सरकारी कंपनियों का कुल खर्च FY26-27 में ₹25,125 करोड़ होगा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर से 43.9% ज़्यादा है।

कंपनियांवार कैपेक्स (Capex) की तस्वीर

इस कैपेक्स (Capex) प्लान में Steel Authority of India Limited (SAIL) सबसे आगे है, जो FY27 में ₹15,000 करोड़ खर्च करने का अनुमान रखती है, जबकि FY26 में यह ₹10,000 करोड़ था। National Mineral Development Corporation (NMDC) भी अपने खर्च को FY26 के ₹6,000 करोड़ से बढ़ाकर FY27 में ₹9,000 करोड़ करने की योजना बना रही है। Manganese Ore India Limited (MOIL) भी ₹800 करोड़ का आवंटन कर रही है, जो पिछले साल के ₹600 करोड़ से ज़्यादा है। ये भारी-भरकम निवेश मुख्य रूप से कंपनियों के इंटरनल और एक्स्ट्रा बजटरी रिसोर्सेज (IEBR) से होंगे, जो इनकी मज़बूत फाइनेंशियल हेल्थ को दर्शाते हैं।

इंडस्ट्री का आउटलुक और भविष्य की राह

कैपेक्स (Capex) में यह तेज़ी स्टील की लगातार डिमांड पर एक बड़ा दांव है। सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग (जैसे PM-AWAS) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस इसकी मुख्य वजह है। नेशनल स्टील पॉलिसी का लक्ष्य 2030-31 तक भारत की स्टील कैपेसिटी को बढ़ाना है। यह सरकारी कंपनियों का पुश ऐसे समय में आया है जब प्राइवेट कंपनियां भी भारी निवेश कर रही हैं; उदाहरण के लिए, JSW Steel अगले पांच सालों में ₹2 लाख करोड़ से ज़्यादा का निवेश करने की योजना बना रही है। यह एक व्यापक इंडस्ट्री एक्सपेंशन का संकेत है, जो भारत को एक बड़ा ग्लोबल स्टील प्रोड्यूसर बनाए रखेगा। सेक्टर ग्रीन स्टील प्रोडक्शन की ओर भी बढ़ रहा है, जो ग्लोबल डीकार्बोनाइजेशन ट्रेंड्स के अनुरूप है।

कंपनियों के आंकड़े और हालिया डेवलपमेंट

जहां तक कंपनियों की बात है, SAIL का मार्केट कैप लगभग ₹61,813 करोड़ और P/E रेश्यो करीब 20.4 है। NMDC, जो भारत का सबसे बड़ा आयरन ओर प्रोड्यूसर है, उसका मार्केट कैप करीब ₹70,669 करोड़ और P/E रेश्यो लगभग 10.06 है। MOIL, देश की प्रमुख मैंगनीज ओर प्रोड्यूसर, का मार्केट कैप करीब ₹6,620 करोड़ और P/E रेश्यो लगभग 22.8 है (फरवरी 2026 की शुरुआत के आंकड़े)। हालिया डेवलपमेंट की बात करें तो, SAIL ने RITES के साथ लॉजिस्टिक्स सुधार के लिए एक MoU साइन किया है और उसे 'Great Place to Work' सर्टिफिकेशन भी मिला है। MOIL ने फरवरी 2026 की डिलीवरी के लिए मैंगनीज ओर की कीमतों में 10% तक की बढ़ोत्तरी की है। वहीं, NMDC अपनी स्टील प्रोडक्शन कैपेसिटी को मज़बूत करने के लिए कनाडा में कोयला भंडार की तलाश कर रहा है, जो सप्लाई चेन्स को सुरक्षित करने की एक अहम रणनीति है।

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