भारत का कच्चा स्टील उत्पादन अगस्त में **14.8 मिलियन टन** के स्तर पर पहुंच गया है। जहां दुनिया भर में उत्पादन गिर रहा है, वहीं भारत में सालाना आधार पर **4.6%** की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अगस्त के महीने में भारत का क्रूड स्टील प्रोडक्शन 14.8 मिलियन टन रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 4.6% अधिक है। दूसरी ओर, वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के 70 देशों में स्टील का उत्पादन 1.2% गिरकर 144.2 मिलियन टन पर आ गया है। इस आंकड़े से साफ है कि घरेलू खपत के दम पर भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक बना हुआ है।\n\n### इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग का दम\n\nभारत में स्टील की खपत का मुख्य कारण सरकारी स्तर पर चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। हाईवे, रेलवे और अर्बन हाउसिंग स्कीमों के चलते JSW Steel, Tata Steel और SAIL जैसी बड़ी कंपनियों के प्लांट पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। घरेलू मांग मजबूत होने की वजह से ये कंपनियां ग्लोबल मार्केट की सुस्ती से काफी हद तक सुरक्षित हैं।\n\nहालांकि, निवेशकों को सावधान रहने की भी जरूरत है। स्टील सेक्टर के मुनाफे पर रॉ मटेरियल की कीमतों, खासकर इंपोर्ट किए जाने वाले कोकिंग कोल का सीधा असर पड़ता है। अगर इनपुट कॉस्ट बढ़ती है और ग्लोबल स्तर पर स्टील के दाम कम होते हैं, तो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है।\n\n### ग्लोबल मार्केट और इंपोर्ट का खतरा\n\nचीन का स्टील उत्पादन अगस्त में 3.7% गिरकर 74.6 मिलियन टन रहा, जबकि भारत में जनवरी से अगस्त के दौरान 6% की वृद्धि के साथ उत्पादन 115.9 मिलियन टन तक पहुंच गया है।\n\nनिवेशकों के लिए एक बड़ा कंसर्न सस्ता स्टील इंपोर्ट भी है। जब दुनिया में डिमांड कम होती है, तो विदेशी स्टील सस्ता होने के कारण भारत में डंप होने लगता है, जिससे घरेलू कंपनियों को अपनी कीमतें घटानी पड़ती हैं। ऐसे में सरकार द्वारा एंटी-डंपिंग ड्यूटी या क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर जैसे कदमों पर नजर रखना बहुत जरूरी हो जाता है।
