India Steel Record Output: ग्रीन एनर्जी और सरकारी पॉलिसी से बढ़ी ग्रोथ, एक्सपोर्ट में भारी उछाल!

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Steel Record Output: ग्रीन एनर्जी और सरकारी पॉलिसी से बढ़ी ग्रोथ, एक्सपोर्ट में भारी उछाल!
Overview

भारत के स्टील सेक्टर ने वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में इतिहास रच दिया है। देश का क्रूड स्टील उत्पादन **168.4 मिलियन टन (MT)** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह शानदार प्रदर्शन घरेलू मांग में मजबूती और सरकार की असरदार नीतियों का नतीजा है।

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रिकॉर्ड उत्पादन और सेक्टर में बड़ा बदलाव

भारत का स्टील सेक्टर अब सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि ग्रीन स्टील (Green Steel), इम्पोर्ट को कम करने और एक्सपोर्ट बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में उत्पादन 168.4 मिलियन टन (MT) तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 10.7% ज्यादा है। इस ग्रोथ का मुख्य कारण इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, रेलवे और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स से लगातार आ रही अच्छी मांग है, जिससे फिनिश्ड स्टील की खपत करीब 7-8% बढ़कर 164 MT हो गई। इस प्रदर्शन के साथ, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक देश बन गया है, जिसका ग्लोबल मार्केट में 7.9% का हिस्सा है।

सरकारी नीतियों से बढ़ा निवेश

इस ट्रांसफॉर्मेशन में सरकारी नीतियों का बड़ा हाथ है। स्पेशियलिटी स्टील के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम ने कंपनियों को ₹44,106 करोड़ के निवेश के वादे के साथ आकर्षित किया है। अब तक ₹23,022 करोड़ का निवेश हो चुका है, जिससे 2.4 मिलियन टन स्पेशियलिटी स्टील क्षमता और 13,000 से ज्यादा नई नौकरियां पैदा हुई हैं। नवंबर 2025 में शुरू हुए PLI 1.2 फेज से इसमें और तेजी आई है। इसी तरह, अप्रैल 2025 से कुछ खास फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स पर 12% की सेफगार्ड ड्यूटी ने डोमेस्टिक प्रोड्यूसर्स को राहत दी है, जिससे इम्पोर्टेड स्टील के मुकाबले स्थानीय स्टील की कीमतें आकर्षक हुई हैं।

ग्रीन स्टील और AI पर फोकस

भारत टिकाऊ स्टील उत्पादन में लीड करने का लक्ष्य रख रहा है। 2024 में ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी (Green Steel Taxonomy) पेश करने वाला भारत पहला देश था, जिसके तहत प्रति टन स्टील पर 2.2 टन कार्बन डाइऑक्साइड से कम उत्सर्जन वाले प्रोडक्शन को ग्रीन स्टील माना जाता है। 31 मार्च तक 89 स्टील यूनिट्स ने ग्रीन स्टील सर्टिफिकेशन हासिल कर लिया है, जो 12.34 MT प्रोडक्शन को कवर करता है। इसके अलावा, यूनियन बजट FY27 में कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी (CCUS) के लिए अगले पांच साल में ₹20,000 करोड़ का ऐलान किया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने में भी तेजी आई है, जो माइनिंग, लॉजिस्टिक्स, प्रोडक्शन, सेफ्टी और सस्टेनेबिलिटी में एफिशिएंसी बढ़ा रहा है। टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी बड़ी कंपनियां AI का इस्तेमाल कर रही हैं।

टॉप कंपनियां और ग्लोबल आउटलुक

JSW Steel ने FY26 में अपना अब तक का सबसे ज्यादा क्रूड स्टील प्रोडक्शन ~30.14 मिलियन टन दर्ज किया, जो पिछले साल से 8% ज्यादा है। कंपनी का रेवेन्यू ₹1.68 लाख करोड़ और EBITDA ₹22,904 करोड़ रहा। टाटा स्टील ने भारत में 23.48 MT का रिकॉर्ड एनुअल क्रूड स्टील प्रोडक्शन किया। Jindal Steel & Power ने भी 9.25 MT का रिकॉर्ड प्रोडक्शन दर्ज किया। एनालिस्ट्स (जैसे HSBC) का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरीकरण से अगले कई सालों तक स्टील की मांग बढ़ती रहेगी। ग्लोबल लेवल पर, 2026 में स्टील की मांग में 0.3% की मामूली वृद्धि का अनुमान है, वहीं भारत सबसे तेजी से बढ़ता हुआ प्रमुख बाजार बनने की ओर अग्रसर है, जहां मांग 7.4% बढ़ने की उम्मीद है।

चुनौतियां: लागत और ग्लोबल ट्रेड

हालांकि, कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। ग्रीन स्टील प्रोडक्शन के लिए बड़े निवेश की जरूरत है, जो प्रति मिलियन टन क्षमता के लिए $2-4 बिलियन तक आ सकता है। ग्रीन हाइड्रोजन की लागत एक बड़ी रुकावट है। भारतीय स्टील निर्माताओं का प्रति टन कार्बन उत्सर्जन अभी भी ग्लोबल एवरेज से ज्यादा है। इसके अलावा, यूरोपीय यूनियन का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) भारतीय स्टील एक्सपोर्ट के लिए 2050 तक $14.5 बिलियन तक का खतरा पैदा कर सकता है। चीन से होने वाला ओवरसप्लाई और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं भी मार्केट में अस्थिरता ला रही हैं।

आगे की राह

सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और मैन्युफैक्चरिंग में तेजी के दम पर भारत का स्टील सेक्टर ग्रोथ जारी रखेगा। FY2027 में मांग 9-10% तक बढ़ने की उम्मीद है। 2030 तक 300 MT उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। वैश्विक दबावों और उत्सर्जन कम करने की लागत के बावजूद, मजबूत घरेलू मांग, सरकारी सपोर्ट और एडवांस टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से यह सेक्टर मजबूत बना रहेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.