भारत के खेती-किसानी में क्रांति आ रही है! सोलर सिंचाई के दम पर ₹5.5 लाख करोड़ का मार्केट तैयार हो रहा है, और PM-KUSUM योजना इसमें बड़ा रोल निभा रही है। Shakti Pumps, Oswal Pumps और Australian Premium Solar जैसी कंपनियां किसानों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ा रही हैं।
खेती में सोलर सिंचाई का बड़ा बूस्ट!
भारत के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। किसान अब डीजल और बिजली पर चलने वाले पारंपरिक सिंचाई पंपों को छोड़कर सोलर पंप की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलाव को सरकार की PM-KUSUM योजना का भी बड़ा सहारा मिल रहा है, जिसके तहत सोलर पंप लगवाने के लिए ₹34,422 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। अनुमान है कि देश में 11 करोड़ से ज्यादा किसानों को सिंचाई की विश्वसनीय सुविधा नहीं मिल पा रही है, जबकि करीब 90 लाख किसान अब भी डीजल पंप पर निर्भर हैं। इस बड़ी जरूरत को पूरा करने में लगभग ₹5.5 ट्रिलियन (यानी ₹5.5 लाख करोड़) का मार्केट पोटेंशियल है। इसमें नए पंपों की खरीद और पुराने डीजल पंपों को बदलना, दोनों शामिल हैं।
इन कंपनियों की हो रही बल्ले-बल्ले!
इस भारी मांग को भुनाने के लिए कई घरेलू कंपनियां अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ा रही हैं।
Shakti Pumps: इस स्कीम के तहत 25% मार्केट शेयर रखने वाली Shakti Pumps का FY26 में रेवेन्यू ₹2,697.6 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 7.2% ज्यादा है। कंपनी ₹1,200 करोड़ का निवेश करके 2.2 GW की सोलर सेल और PV मॉड्यूल प्लांट लगा रही है, ताकि डोमेस्टिक कंटेंट की जरूरतें पूरी हों और मुनाफा बढ़े। 1982 से काम कर रही इस कंपनी ने सरकारी स्कीम के तहत 1,52,594 से ज्यादा सोलर पंप लगाए हैं।
Oswal Pumps: पिछले पांच सालों में इस कंपनी के सोलर पंप बिजनेस ने 54.7% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू ₹2,064.4 करोड़ रहा, जो 44.3% की बढ़त है। Oswal Pumps अपने पंप और मोटर बनाने की कैपेसिटी को 2.3 गुना और सोलर मॉड्यूल प्रोडक्शन को 2.1 GW तक बढ़ा रही है।
Australian Premium Solar (APS): इस कंपनी के सोलर पंप डिवीजन ने FY26 में ₹308 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट किया है। कंपनी का कुल कंसोलिडेटेड इनकम FY26 में ₹708.8 करोड़ रहा, जो 60.7% की ग्रोथ दिखाता है। कंपनी का EBITDA मार्जिन फिलहाल 12% है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
हालांकि, इस सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
सरकारी योजनाओं पर निर्भरता: इन कंपनियों का बिजनेस मॉडल काफी हद तक सरकारी स्कीमों पर निर्भर है। ऐसे में, सरकारी एजेंसियों से पेमेंट मिलने में देरी होने पर कंपनियों के कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है।
बढ़ती लागत से मार्जिन पर दबाव: कई कंपनियां बढ़ती लागत के कारण मार्जिन प्रेशर झेल रही हैं। Shakti Pumps और Oswal Pumps के हालिया नतीजों में यह साफ दिख रहा है।
कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव: कच्चे माल की कीमतों में अनिश्चितता और नई सरकारी ऑर्डर्स की रफ्तार भी मुनाफे पर असर डाल सकती है।
कंपनियों के लिए आगे का रास्ता उनकी घोषित मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को समय पर पूरा करने और इस पॉलिसी-ड्रिवन मार्केट में अपना ऑपरेटिंग मार्जिन बनाए रखने पर निर्भर करेगा।
