भारतीय स्टील एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। यूरोपियन यूनियन (EU) ने भारतीय स्टील के लिए **2.8 मिलियन टन** का ड्यूटी-फ्री कोटा तय कर दिया है, जिससे कंपनियां अब **50%** के भारी पेनल्टी शुल्क से बच सकेंगी।
भारतीय स्टील कंपनियों के लिए यह एक बड़ी स्ट्रैटेजिक जीत है। 1 जुलाई से लागू हुए इस नए नियम के तहत, भारतीय स्टील बिना किसी अतिरिक्त 'सेफगार्ड ड्यूटी' के यूरोपीय देशों में भेजा जा सकेगा। इस 2.8 मिलियन टन के कुल कोटे में 1.9 मिलियन टन हिस्सा विशेष रूप से भारत के लिए है, जबकि 0.9 मिलियन टन अन्य देशों के साथ साझा क्षमता का हिस्सा है।
एक्सपोर्ट प्लानिंग में आएगी मजबूती
आंकड़ों पर गौर करें तो भारत हर साल औसतन 3 मिलियन टन स्टील यूरोप भेजता है। इस नए कोटे के साथ, भारत का 80% से ज्यादा एक्सपोर्ट वॉल्यूम अब ड्यूटी-फ्री दायरे में आ गया है। इससे Tata Steel, JSW Steel, और Jindal Stainless जैसी दिग्गज कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन और प्रोडक्शन प्लानिंग करने में काफी आसानी होगी, क्योंकि अब उन पर भारी जुर्माने का डर कम हो गया है।
नई चुनौतियां: CBAM और कार्बन उत्सर्जन
हालांकि ड्यूटी-फ्री का फायदा तो मिलेगा, लेकिन निवेशकों को EU के नए नियमों से सावधान रहना होगा। यूरोप ने Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) लागू किया है, जिसके तहत आयातित माल के कार्बन फुटप्रिंट पर टैक्स लगेगा। अगर भारतीय कंपनियों ने समय रहते अपने मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को क्लीन एनर्जी के अनुरूप नहीं ढाला, तो कार्बन सर्टिफिकेट्स की लागत इस ड्यूटी-फ्री छूट के फायदे को कम कर सकती है।
आगे की राह
यह व्यवस्था 2027 तक होने वाले संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए एक ब्रिज का काम करेगी। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि कंपनियां इस कोटे का कितना इस्तेमाल कर पाती हैं और कार्बन नियमों के पालन को लेकर मैनेजमेंट क्या कदम उठाता है।
