एनर्जी सिक्योरिटी पर फोकस, LPG की चिंता बढ़ा रही मांग
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ऊर्जा सप्लाई रूट्स में आई रुकावटों ने भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन चिंताओं के बीच, लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की उपलब्धता और कीमतों को लेकर कंज्यूमर्स परेशान हैं, जिससे इलेक्ट्रिक कुकिंग विकल्पों, खासकर इंडक्शन कुकटॉप्स की मांग में ज़बरदस्त उछाल आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में इंडक्शन कुकटॉप्स की मांग 8 से 10 गुना तक बढ़ गई है, वहीं दूसरे इलेक्ट्रिक किचन एप्लायंसेज की मांग में भी 3 से 5 गुना का इज़ाफा देखा गया है।
कंपनियां बढ़ा रहीं प्रोडक्शन, दिख रही है लंबी मियाद की उम्मीद
इंडस्ट्री के प्लेयर्स इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए तैयार दिख रहे हैं। Wonderchef जैसी कंपनियां अपने प्रोडक्शन को बढ़ाने की योजना बना रही हैं और अगले 12 से 24 महीनों तक ऐसी ही हाई डिमांड बने रहने की उम्मीद कर रही हैं। भारत सरकार भी इस मैन्युफैक्चरिंग विस्तार को सपोर्ट करने के लिए सक्रिय है। कॉमर्स मिनिस्ट्री, पावर मिनिस्ट्री, DPIIT और DGFT के बीच हुई एक अहम मीटिंग में प्रोडक्शन से जुड़ी संभावित दिक्कतों को दूर करने और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा हुई।
भारतीय एप्लायंस मार्केट बनेगा ग्लोबल पावरहाउस?
भारतीय होम एप्लायंस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में ज़बरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है। यह सेक्टर फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) तक दुनिया का चौथा सबसे बड़ा मार्केट बनने की राह पर है और फाइनेंशियल ईयर 29 (FY29) तक ₹3 लाख करोड़ का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के सख्त एनर्जी एफिशिएंसी नॉर्म्स, जो 1 जनवरी, 2026 से लागू होने वाले हैं, कंपनियों को ज़्यादा एनर्जी-एफिशिएंट प्रोडक्ट्स बनाने और प्रमोट करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर बढ़ते रुझान के अनुरूप है।
सेक्टर की बड़ी कंपनियों का फाइनेंशियल प्रोफाइल
इस बढ़ती मांग का फायदा कई बड़ी कंपनियों को मिल सकता है।
- TTK Prestige का मार्केट कैप करीब ₹6,669 करोड़ है, जिसका P/E रेश्यो 48.59 है। हालांकि, पिछले पांच सालों में इसकी सेल्स ग्रोथ मामूली रही है और ROE (Return on Equity) भी कम है।
- Bajaj Electricals का मार्केट कैप लगभग ₹4,040 करोड़ है और P/E रेश्यो 112.94 है।
- Havells India का मार्केट कैप ₹74,000 करोड़ से ज़्यादा है और P/E रेश्यो करीब 50.15 है।
- Philips India ने FY25 के लिए ₹6,630 करोड़ का रेवेन्यू रिपोर्ट किया है।
एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए इंपोर्टेड कंपोनेंट्स पर निर्भरता के बावजूद, कंपनियां लोकल मैन्युफैक्चरिंग और AI फीचर्स में इन्वेस्ट कर रही हैं।
इनपुट कॉस्ट बढ़ने और आर्थिक दबाव का है खतरा
इंडक्शन एप्लायंस की बढ़ती मांग एक बड़ा अवसर तो है, लेकिन कुछ जोखिम भी हैं जिन पर गौर करना ज़रूरी है। पश्चिम एशिया के संकट ने एनर्जी इंपोर्ट के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और केमिकल्स जैसे रॉ-मटेरियल की इनपुट कॉस्ट को भी तेज़ी से बढ़ा दिया है। इससे प्रोडक्ट्स की कीमतें ₹100 से बढ़कर ₹140 तक पहुंच सकती हैं, जो टियर 2 और टियर 3 शहरों के कंज्यूमर्स के लिए अफोर्डेबिलिटी का मुद्दा बन सकता है।
व्यापक आर्थिक और सेक्टरल चुनौतियां
सरकार ने 30 जून, 2026 तक कुछ ज़रूरी पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी से छूट दी है, जो राहत तो देती है, लेकिन यह सेक्टर की इंपोर्टेड पार्ट्स पर निर्भरता को भी दर्शाती है। लंबे समय तक चलने वाले जियोपॉलिटिकल टेंशन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ सकता है। अनुमान है कि अगर ये रुकावटें जारी रहीं तो भारत की GDP ग्रोथ में 1% की कमी आ सकती है और इन्फ्लेशन में 1.5% की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में कंज्यूमर स्पेंडिंग, खासकर ड्यूरेबल गुड्स पर, कम हो सकती है। कमजोर होता भारतीय रुपया इंपोर्ट कॉस्ट को और बढ़ाएगा और अगर सब्सिडी बढ़ाने की ज़रूरत पड़ी तो फिस्कल मैनेजमेंट मुश्किल हो सकता है। Havells India जैसी डेट-फ्री कंपनियां, जो मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी मेट्रिक्स (ROE और ROCE) रखती हैं, मार्जिन प्रेशर को झेलने में ज़्यादा सक्षम हो सकती हैं।
एनर्जी सिक्योरिटी के लिए इलेक्ट्रिफिकेशन है चाबी
इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर यह बदलाव भारत के व्यापक एनर्जी ट्रांज़िशन लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका मकसद एनर्जी सिक्योरिटी को मज़बूत करना और कार्बन एमिशन को कम करना है। 'GoElectric' कैंपेन जैसे सरकारी प्रोग्राम और LPG सब्सिडी को इंडक्शन एप्लायंस में निवेश के लिए इस्तेमाल करने जैसे प्रस्तावित सुधार, इस बदलाव के प्रति सरकार की लंबी अवधि की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। अर्बनाइजेशन, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन और बढ़ती मिडिल क्लास की वजह से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स मार्केट में मज़बूत ग्रोथ की उम्मीद है। एनर्जी-एफिशिएnt और स्मार्ट एप्लायंसेज की लगातार मांग, साथ ही लोकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सरकारी समर्थन, इंडक्शन एप्लायंस सेक्टर के लिए एक चुनौतीपूर्ण लेकिन उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है।