इंडस्ट्री में 'स्ट्रक्चरल डिसरप्शन' का दौर
इंडियन प्लास्टिक फेडरेशन (IPF) ने मौजूदा हालात को सिर्फ एक अस्थायी उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि एक 'स्ट्रक्चरल डिसरप्शन' यानी ढांचागत बाधा करार दिया है। यह स्थिति लागत, सप्लाई चेन और वर्किंग कैपिटल पर भारी दबाव डाल रही है, खासकर सेक्टर की माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए।
'ज़रूरी वस्तु' का दर्जा क्यों जरूरी?
IPF के प्रेसिडेंट अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि प्लास्टिक कई अहम इंडस्ट्री जैसे फूड, हेल्थकेयर, पैकेजिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्लास्टिक को 'ज़रूरी वस्तु' घोषित करने से सप्लाई सुनिश्चित होगी और मौजूदा संकट को प्रभावी ढंग से संभाला जा सकेगा।
सरकार से नीतिगत मदद और स्थिरता की उम्मीद
सरकार द्वारा प्रमुख पॉलीमर प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी कम करने जैसे कदमों का स्वागत करते हुए, IPF अब इन ड्यूटी छूट को अगले छह महीने तक बढ़ाने की मांग कर रहा है। फेडरेशन ने डोमेस्टिक पेट्रोकेमिकल कंपनियों से भी सप्लाई बनाए रखने का आग्रह किया है। IPF के मानद सचिव सौरभ गरोडिया ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए इंडस्ट्री की तेजी और एडॉप्टिव सप्लाई चेन स्ट्रैटेजीज के महत्व पर प्रकाश डाला।