Construction Equipment: भारत का बड़ा दांव! ₹10,000 करोड़ की स्कीम से चीनी आयात पर लगेगी लगाम

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AuthorNeha Patil|Published at:
Construction Equipment: भारत का बड़ा दांव! ₹10,000 करोड़ की स्कीम से चीनी आयात पर लगेगी लगाम

भारत सरकार अब हाई-वैल्यू कंस्ट्रक्शन मशीनरी, जैसे टनल बोरिंग मशीन और एलिवेटर के डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए **$1.2 बिलियन (लगभग ₹10,000 करोड़)** की इंसेटिव स्कीम लाने की तैयारी में है। इस कदम से चीन पर निर्भरता कम होगी और अगले सात सालों में **$1.8 बिलियन** का नया निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।

हाई-वैल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट पर फोकस

सरकार की यह नई पॉलिसी उन टेक्निकली एडवांस्ड इक्विपमेंट के लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देगी, जो फिलहाल आयात किए जाते हैं, खासकर चीन से। इनमें टनल बोरिंग मशीन (TBMs) शामिल हैं, जो मेट्रो रेल और हाईवे नेटवर्क के विस्तार के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके अलावा, फायर-फाइटिंग इक्विपमेंट और हाई-राइज एलिवेटर भी इस स्कीम के दायरे में होंगे। सरकार वित्तीय प्रोत्साहन देकर इन जटिल मशीनों के लोकल प्रोडक्शन को किफायती और प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य रख रही है।

कौन होंगे फायदे में?

इस पहल में कई कंपनियां अहम भूमिका निभा सकती हैं। सरकारी कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) पहले ही टनल बोरिंग मशीनों के डोमेस्टिक प्रोडक्शन में रुचि दिखा चुकी है। वहीं, बड़ी प्राइवेट कंपनियों जैसे लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro) और जॉनसन लिफ्ट्स (Johnson Lifts) से भी इस स्कीम के तहत फायदा उठाने की उम्मीद है। इस पहल का मकसद सात सालों में लगभग $1.8 बिलियन का नया निवेश लाना है, ताकि सिर्फ इम्पोर्टेड पार्ट्स को असेंबल करने के बजाय भारत में मैन्युफैक्चरिंग और हाई-वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जा सके।

जोखिम और चुनौतियां

हालांकि, इस प्लान का मकसद लोकल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को मजबूत करना है, लेकिन इसकी सफलता प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर्स को मौजूदा ग्लोबल सप्लायर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जो फिलहाल हाई-वैल्यू इक्विपमेंट मार्केट पर हावी हैं। इसके अलावा, इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए कंपनियों को कड़े लोकल वैल्यू-एडिशन टारगेट्स को पूरा करना होगा। इन मानदंडों को पूरा न कर पाने पर सपोर्ट का असर सीमित हो सकता है।

व्यापक आर्थिक कारक भी जोखिम पैदा करते हैं। ग्लोबल जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं और रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव नए मशीनरी की मांग को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, मल्टी-स्टेकहोल्डर पॉलिसी फ्रेमवर्क पर निर्भरता का मतलब है कि एडमिनिस्ट्रेटिव अप्रूवल या अंतर-मंत्रालयीन समन्वय में किसी भी देरी से प्रोजेक्ट का प्रभाव टल सकता है।

निवेशक और इंडस्ट्री वॉचर्स इस महीने के अंत में यूनियन कैबिनेट से होने वाली औपचारिक घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें स्कीम की एलिजिबिलिटी, पेआउट स्ट्रक्चर्स और कार्यान्वयन के रोडमैप के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.