इंडिया की पैकेजिंग मार्केट में बड़ा उछाल
Avendus Capital की रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया की पैकेजिंग इंडस्ट्री FY30 तक $92 बिलियन के आंकड़े को छू सकती है। यह सेक्टर अगले पांच सालों में सालाना औसतन 9% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। यह ग्रोथ रेट भारत को दुनिया का सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ने वाला पैकेजिंग मार्केट बनाएगा, जो देश की ओवरऑल GDP ग्रोथ से भी आगे निकल जाएगा।
किस सेक्टर से आ रही है डिमांड?
पैकेजिंग की मांग फ़ूड एंड बेवरेज, फार्मा, पर्सनल केयर, एग्री, ड्यूरेबल्स और ई-कॉमर्स जैसे अहम सेक्टर्स में तेजी से बढ़ रही है। ऑर्गेनाइज्ड रिटेल की बढ़ती मौजूदगी और क्विक कॉमर्स के आने से भी इस डिमांड को और बल मिल रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विकसित देशों की तुलना में भारत में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक पैकेजिंग की खपत काफी कम है, जो भविष्य में मार्केट के लिए बड़ी गुंजाइश दिखाती है।
अलग-अलग पैकेजिंग सेग्मेंट्स और इन्वेस्टर इंटरेस्ट
रिजिड प्लास्टिक पैकेजिंग में सबसे तेज ग्रोथ का अनुमान है, जो 10.3% CAGR से बढ़ेगी। फ्लेक्सिबल प्लास्टिक पैकेजिंग, जो मार्केट का सबसे बड़ा सेगमेंट है (कुल मार्केट का 27%), में फ़ूड, FMCG, पर्सनल केयर और फार्मा कंपनियों से लगातार अच्छी डिमांड बनी हुई है। पेपर पैकेजिंग भी धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि कंपनियां रीसाइकिल होने वाले फाइबर-बेस्ड मटीरियल की ओर रुख कर रही हैं। ग्लास और मेटल पैकेजिंग में क्रमशः 7.5% और 7% CAGR की ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
इन्वेस्टर्स का फोकस क्यों है पैकेजिंग पर?
Avendus Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर, Koushik Bhattacharyya ने कहा कि पैकेजिंग इंडस्ट्री इंडिया के कंजम्पशन ट्रेंड्स का एक अहम इंडिकेटर है। बढ़ती इनकम, प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर ग्राहकों का झुकाव और रिटेल व सप्लाई चेन का फॉर्मलाइजेशन इस सेक्टर के लिए माकूल माहौल बना रहे हैं। इन लगातार चल रहे ट्रेंड्स से डील एक्टिविटी और कंसॉलिडेशन को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जो स्ट्रैटेजिक और फाइनेंशियल इन्वेस्टर्स दोनों को आकर्षित कर रहा है। पिछले एक दशक में प्राइवेट इक्विटी फर्म्स ने भी काफी दिलचस्पी दिखाई है, जो 76% माइनॉरिटी ट्रांजैक्शन और 25% मेजॉरिटी ट्रांजैक्शन का हिस्सा रहे हैं।