बढ़त जारी, पर रफ़्तार हुई धीमी
अप्रैल में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने विस्तार दिखाना जारी रखा, जिसमें HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI मार्च के 53.9 से बढ़कर 54.7 हो गया। यह लगातार ग्रोथ का दौर है, लेकिन नए ऑर्डर और आउटपुट में सुधार की गति काफी धीमी पड़ गई है, जो लगभग चार सालों में दूसरी सबसे कम बढ़ोतरी है। इस सुस्त मांग के बावजूद, मैन्युफैक्चरर्स (Manufacturers) ने पिछले दस महीनों में सबसे तेज़ी से वर्कफ़ोर्स (Workforce) में बढ़ोतरी की है।
इनपुट कॉस्ट (Input Cost) में तेज़ उछाल
सेक्टर के सामने एक बड़ी चुनौती इनपुट कॉस्ट (Input Cost) में तेज़ी से आई बढ़ोतरी है, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे ज़्यादा हो गई है। मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे संघर्षों के कारण फ्यूल, गैस, तेल और कच्चे माल की ग्लोबल कीमतें बढ़ रही हैं। इसी के चलते, मैन्युफैक्चरर्स ने पिछले छह महीनों में सबसे तेज़ रफ़्तार से अपने आउटपुट प्राइस (Output Price) बढ़ाए हैं, ताकि बढ़ती लागत का कुछ बोझ ग्राहकों पर डाला जा सके।
ग्लोबल ट्रेंड्स और खतरे
दुनिया भर में मैन्युफैक्चरिंग परफॉरमेंस (Performance) मिली-जुली रही। अमेरिका (United States) में सेक्टर मई 2022 के बाद सबसे मज़बूत विस्तार देख रहा है। वहीं, एशिया (Asia) के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव देखा गया, जहाँ सप्लाई की कमी और बढ़ती कीमतों की चिंताओं के चलते प्रोडक्शन ग्रोथ को सहारा मिला। भारत के लिए, मिडिल ईस्ट संघर्ष कमोडिटी की कीमतों में और ज़्यादा उतार-चढ़ाव और शिपिंग में रुकावट का खतरा पैदा करता है। ये बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट (Input Cost) मैन्युफैक्चरर्स के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर दबाव बना रही है, खासकर अगर वे इसे पूरी तरह ग्राहकों से वसूल नहीं कर पाते।
एक्सपोर्ट डिमांड (Export Demand) से मिली बड़ी राहत
घरेलू लागत के दबाव के बावजूद, भारतीय मैन्युफैक्चर्ड गुड्स (Manufactured Goods) के लिए नए एक्सपोर्ट ऑर्डर (Export Orders) में ज़बरदस्त तेज़ी आई, जो पिछले सात महीनों में सबसे मज़बूत स्तर पर पहुंच गया। यह मज़बूत ग्लोबल डिमांड ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता खोलती है। सेक्टर का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह लगातार बढ़ती लागत की चुनौतियों से कैसे निपटता है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अपने मज़बूत एक्सपोर्ट परफॉरमेंस (Performance) को घरेलू चुनौतियों के साथ कैसे संतुलित करता है।
