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Ganesha Ecosphere, Uflex Share Price: सरकारी नियम से रॉकेट बने शेयर! ₹1,000 के पार पहुंचा Ganesha Ecosphere

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Ganesha Ecosphere, Uflex Share Price: सरकारी नियम से रॉकेट बने शेयर! ₹1,000 के पार पहुंचा Ganesha Ecosphere
Overview

1 अप्रैल, 2026 से लागू हुए सरकारी नियम के बाद, Ganesha Ecosphere और Uflex के शेयरों में तूफानी तेजी देखी गई। इस नियम के तहत अब फूड और बेवरेज पैकेजिंग में **40%** रीसाइकल्ड कंटेंट (recycled content) का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। इस खबर से Ganesha Ecosphere के शेयर **20%** उछलकर अपने अपर सर्किट पर पहुंच गए, जबकि Uflex में **18%** की बड़ी बढ़त दर्ज हुई।

पैकेजिंग स्टॉक्स में बंपर तेजी

1 अप्रैल, 2026 को पैकेजिंग सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। Ganesha Ecosphere का शेयर अपने 20% अपर सर्किट ₹1,022.70 पर पहुंच गया, जबकि Uflex के शेयर 18% बढ़कर ₹393.70 पर बंद हुए। दोनों कंपनियों के ट्रेडिंग वॉल्यूम (trading volumes) भी औसत से कई गुना ज्यादा रहे, जो निवेशकों की दिलचस्पी को साफ दर्शाते हैं।

नया नियम, नई उम्मीदें

यह तेजी सरकार द्वारा जारी उस नोटिफिकेशन के बाद आई, जिसमें फूड और बेवरेज पैकेजिंग में कम से कम 40% रीसाइकल्ड कंटेंट (recycled content) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। यह आंकड़ा फाइनेंशियल ईयर 2028-29 तक बढ़ाकर 60% कर दिया जाएगा।

रीसाइकल्ड PET मार्केट में बूम

यह कदम भारत के रीसाइकल्ड PET (rPET) मार्केट के लिए बड़ा बूस्ट माना जा रहा है। अनुमान है कि यह मार्केट 2023 में $10.67 बिलियन का था और 2030 तक बढ़कर लगभग $17.53 बिलियन तक पहुंच सकता है, जिसमें सालाना 7.35% की ग्रोथ का अनुमान है।

Ganesha Ecosphere: मिली नई संजीवनी

Ganesha Ecosphere, जो भारत की सबसे बड़ी PET वेस्ट रीसाइक्लर है और जिसकी क्षमता 150,000 MTPA से अधिक है, इस नए नियम से सीधे तौर पर फायदा उठाने की स्थिति में है। हालांकि, कंपनी पिछले कुछ समय से चुनौतियों का सामना कर रही थी। इसके शेयर में पिछले साल 56.50% की गिरावट आई थी और Q2 FY26 में कंपनी को थोड़ा नेट लॉस (net loss) भी हुआ था। इसका P/E रेश्यो (price-to-earnings ratio) 55x से 70x के बीच है, जो प्रीमियम वैल्यूएशन (premium valuation) का संकेत देता है।

Uflex की स्थिति

दूसरी ओर, फ्लेक्सिबल पैकेजिंग (flexible packaging) और फिल्म्स की प्रमुख कंपनी Uflex के लिए भी मांग बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन कंपनी की वित्तीय स्थिति थोड़ी चिंताजनक है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में इसका नेट प्रॉफिट (net profit) घटकर ₹157.88 करोड़ रह गया, जबकि मार्च 2023 में यह ₹480.76 करोड़ था। कंपनी पर कर्ज भी काफी है, जिसका डेट-टू-इक्विटी (debt-to-equity) रेश्यो लगभग 1.21x है।

जोखिम और आगे की राह

हालांकि, रीसाइकल्ड मटेरियल की बढ़ती लागत, सप्लाई में अस्थिरता और कम्पटीशन (competition) जैसे जोखिम बने हुए हैं। भविष्य में इन कंपनियों को लागत प्रबंधन (cost management) और कच्चे माल की स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करनी होगी ताकि वे इस नए नियम का पूरा फायदा उठाकर टिकाऊ वित्तीय सफलता हासिल कर सकें।

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