वैश्विक तनाव के बीच SEZ को मिली रियायत
सरकार का यह कदम वैश्विक व्यापार में चल रहे तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में संघर्ष और अमेरिकी टैरिफ के लंबे असर को देखते हुए उठाया गया है। इस रियायत का मकसद SEZ निर्माताओं पर पड़ रहे दबाव को कम करना और उनकी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने डोमेस्टिक सेल्स को आसान बनाने के लिए ये छूटें दी हैं, ताकि व्यापार में रुकावटों से बचा जा सके।
क्या हैं रियायत की शर्तें?
हालांकि, इस राहत के साथ कई सख्त नियम भी जुड़े हैं। जिन SEZ यूनिट्स ने 31 मार्च 2025 तक उत्पादन शुरू कर दिया था और कम से कम 20% वैल्यू एडिशन किया है, वही इसके लिए योग्य होंगी। सबसे अहम बात यह है कि घरेलू बाजार में बिक्री की सीमा, पिछले तीन सालों के सबसे ज़्यादा फ्री ऑन बोर्ड (FOB) निर्यात मूल्य के 30% तक ही सीमित रहेगी।
एक्सपर्ट्स की राय: असर सीमित रहेगा?
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अजय श्रीवास्तव जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर बहुत सीमित रहेगा। वे बताते हैं कि ड्यूटी में कटौती बहुत मामूली है, आमतौर पर 1% के आसपास। साथ ही, इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) में कोई राहत नहीं है, जिससे कुल फायदा कम हो जाता है। पेट्रोल और डीजल जैसे प्रमुख उत्पादों को इस सूची से बाहर रखा गया है, जो रिफाइनरियों के लिए बड़ी राहत नहीं देगा, हालांकि पेट्रोलियम कोक को शामिल किया गया है। यह संकेत देता है कि सरकार स्थानीय उद्योगों को बचाने के लिए सावधानी बरत रही है।
SEZ के गहरे मुद्दे अनसुलझे?
SEZ क्षेत्र में यूनिटों के बंद होने और रोजगार घटने की खबरें चिंताजनक हैं। पिछले 5 सालों में 466 SEZ यूनिट्स बंद हो चुकी हैं, जिनमें से अकेले FY25 में 100 यूनिट्स बंद हुईं। रोजगार भी घटकर 31.77 लाख रह गया है। विशेषज्ञों का सवाल है कि क्या यह 'एक बार की' रियायत SEZ के मूल संरचनात्मक मुद्दों को हल कर पाएगी? वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में, जहाँ घरेलू बाजार से जुड़ने में अधिक लचीलापन है, भारत के SEZ में एफडीआई (FDI) को आकर्षित करने में दिक्कतें आती हैं। आईटी और सेवा क्षेत्र का दबदबा होने के बावजूद, ये क्षेत्र उतने रोजगार पैदा नहीं करते जितनी भारत को ज़रूरत है।
सरकार का कहना: यह एक बार का ही मौका
सरकारी अधिकारियों का जोर है कि यह रियायत केवल एक बार के लिए है और इसे स्थायी नीति बनाने की कोई प्रतिबद्धता नहीं है। निर्यात को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को बेहतर ढंग से समन्वित करने के लिए एक व्यापक योजना भी बनाई जा रही है। यह छूट विनिर्माण को स्थिर करने और रोजगार का समर्थन करने का प्रयास है, लेकिन इसका दीर्घकालिक प्रभाव वैश्विक व्यापार की स्थिति और भविष्य की नीतिगत अपडेट पर निर्भर करेगा।