भारतीय फुटवियर एक्सपोर्ट को बूस्ट! US ने घटाईं टैरिफ दरें, ₹2500 Cr के निवेश की उम्मीद

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारतीय फुटवियर एक्सपोर्ट को बूस्ट! US ने घटाईं टैरिफ दरें, ₹2500 Cr के निवेश की उम्मीद
Overview

US के साथ हुए नए ट्रेड एग्रीमेंट के चलते भारतीय फुटवियर एक्सपोर्टर्स के लिए अच्छी खबर आई है। इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय जूतों पर लगने वाले इंपोर्ट ड्यूटी को **50%** तक घटाकर **18%** कर दिया है, जिससे एक्सपोर्टर्स की कॉम्पिटिटिवनेस (competitiveness) बढ़ेगी। Florence Shoe Company के चेयरमैन Aqeel Panaruna ने कहा है कि इस फैसले से कंपनी ₹2,500 करोड़ के एक बड़े ताइवानी ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) के साथ विस्तार की उम्मीद कर रही है। जनवरी-नवंबर 2025 के दौरान, भारत के टेक्सटाइल और कपड़ा निर्यात में $**531 मिलियन** की गिरावट देखी गई थी, जिसे यह डील पटरी पर लाने में मदद कर सकती है।

टैरिफ राहत से एक्सपोर्टर्स में जगी उम्मीद

अमेरिका, भारतीय फुटवियर एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ा बाज़ार है, और हालिया द्विपक्षीय व्यापार समझौते के बाद यहाँ निर्यात को पंख लगने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत, भारतीय सामानों पर लगने वाले इम्पोर्ट ड्यूटी को भारी कटौती के साथ 50% तक से घटाकर 18% कर दिया गया है। कई सालों से, ये ऊंची टैरिफ दरें और अतिरिक्त पेनाल्टी ड्यूटीज़, लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स जैसे फुटवियर के लिए बड़ा रोड़ा बनी हुई थीं। इसके चलते भारतीय एक्सपोर्टर्स को भारी डिस्काउंट देकर नुकसान उठाना पड़ता था। इस कदम से लागत में तुरंत सुधार होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय कंपनियां खोया हुआ मार्केट शेयर वापस पा सकेंगी। साथ ही, अमेरिकी खरीदार भी भारत से ज़्यादा माल मंगवाने के लिए प्रेरित होंगे, जिन्हें पहले वियतनाम या बांग्लादेश (जो 20% टैरिफ झेल रहे थे) की तुलना में ज़्यादा ड्यूटी चुकानी पड़ती थी। यह रणनीतिक टैरिफ समायोजन (tariff recalibration) एक महत्वपूर्ण मोड़ है, और यह संभावित रूप से नवंबर 2025 में भारत के टेक्सटाइल और कपड़ा निर्यात में देखी गई 31.4% की गिरावट को उलट सकता है।

Florence Shoe Company की बड़ी योजनाएं

Florence Shoe Company के चेयरमैन Aqeel Panaruna इस अमेरिकी ट्रेड डील को अपनी कंपनी के लिए बड़ी क्षमता विस्तार (capacity expansion) और नए निवेश का एक महत्वपूर्ण जरिया मान रहे हैं। 1995 से अमेरिका और यूरोप में पुरुषों और महिलाओं के फुटवियर एक्सपोर्ट कर रही है, नए प्रोडक्ट लाइन्स और बड़े कैपिटल आउटले (capital outlay) के साथ आगे बढ़ने की योजना बना रही है। इस रणनीति का एक अहम हिस्सा ताइवानी कंपनी के साथ ₹2,500 करोड़ का प्रस्तावित ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) है। यह दिखाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में दिलचस्पी ले रहे हैं। इसी कड़ी में, ताइवान की हांग फू इंडस्ट्रियल ग्रुप (Hong Fu Industrial Group) ने तमिलनाडु में ₹1,500 करोड़ का प्लांट लगाया है, जिसकी उत्पादन क्षमता 200 मिलियन जोड़ी जूते बनाने की है, और इस प्रोजेक्ट में Panaruna की भी अहम भूमिका रही। Florence Shoe Company की क्षमता फिलहाल 2 मिलियन जोड़ी जूते प्रति वर्ष है। ऐसे वेंचर्स भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर स्थापित करने के रणनीतिक महत्व को दर्शाते हैं, जो बड़े पैमाने और नवाचार (innovation) के अवसर प्रदान करते हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर और लागत की बनी हुई हैं बाधाएं

हालांकि, टैरिफ में मिली इस राहत के बावजूद, भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री को अभी भी कुछ गंभीर ढांचागत (structural) चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो इस ट्रेड समझौते के पूरे प्रभाव को सीमित कर सकती हैं। भारत में लॉजिस्टिक्स की लागत (logistics costs), जो ऐतिहासिक रूप से जीडीपी का 13-14% रही है, दक्षता (efficiency) के रास्ते में एक बड़ी रुकावट बनी हुई है, जबकि इसे सिंगल डिजिट में लाने का लक्ष्य है। सरकार के 'पीएम गति शक्ति' (PM Gati Shakti) जैसे पहलों से इंफ्रास्ट्रक्चर को सुव्यवस्थित करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला करने के लिए जितनी तेज़ी और बड़े पैमाने पर विकास की ज़रूरत है, वह अभी पूरी तरह से हासिल नहीं हुआ है। इसके अलावा, इंडस्ट्री एक बिखरे हुए ढांचे (fragmented structure), इंपोर्टेड कच्चे माल पर निर्भरता और वियतनाम व इंडोनेशिया जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा से जूझ रही है, जिनके पास स्थापित और अत्यधिक कुशल सप्लाई चेन हैं। Florence Shoe Company और अन्य कंपनियां जहां विस्तार की योजना बना रही हैं, वहीं उनकी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मूल्य (competitive pricing) पेश करने की क्षमता इन आंतरिक लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर की बाधाओं को दूर करने पर निर्भर करेगी। जूते के ऊपरी हिस्से (shoe uppers) के लिए इनपुट के ड्यूटी-फ्री आयात जैसे उपायों से कुछ लागत दबाव कम हुआ है, लेकिन राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की बुनियादी ज़रूरत बनी हुई है।

विविधीकरण और सेक्टर वैल्यूएशन

कंपनी अपनी एक्सपोर्ट मार्केट को लेकर एक संतुलित रणनीति अपना रही है, जिसमें अमेरिका को स्केल और इनोवेशन के लिए, यूरोप को डिज़ाइन-आधारित उत्पादों के लिए, यूके को निरंतरता के लिए और EFTA देशों को प्रीमियम सेगमेंट के लिए महत्व दिया जा रहा है। यह पोर्टफोलियो दृष्टिकोण किसी एक बाज़ार पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करता है। भारतीय फुटवियर और परिधान क्षेत्र में कई पब्लिकली लिस्टेड कंपनियां हैं, जिनके P/E रेश्यो (P/E ratios) में काफी भिन्नता है। मार्केट लीडर्स जैसे पेज इंडस्ट्रीज (Page Industries) के P/E मल्टीपल्स लगभग 47-49 के आसपास ट्रेड करते हैं, जबकि अरविंद लिमिटेड (Arvind Ltd) और गोकलदास एक्सपोर्ट्स (Gokaldas Exports) जैसे अन्य 22-43 की रेंज में हैं, जो विविध विकास संभावनाओं और परिचालन दक्षता को दर्शाते हैं। Florence Shoe Company, जो कि एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, का पब्लिक वैल्यूएशन नहीं है, लेकिन उसके विस्तार की योजनाएं और ज्वाइंट वेंचर, पॉजिटिव ट्रेड समाचारों के साथ मिलकर, उद्योग की व्यापक चुनौतियों से निपटने पर निर्भर एक आशावादी दृष्टिकोण का संकेत देते हैं।

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