प्रोडक्शन कॉस्ट (Production Cost) में तेज उछाल
Q4 FY26 में, करीब 70% भारतीय मैन्युफैक्चरर्स ने बिक्री की तुलना में अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट (Production Cost) में काफी बढ़ोतरी की सूचना दी है, जो पिछले क्वार्टर के 57% से एक बड़ी छलांग है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, करेंसी डेप्रिसिएशन (Currency Depreciation) और लॉजिस्टिक्स (Logistics) व एनर्जी (Energy) खर्चों में इजाफा कई कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर दबाव बना रहा है।
वेस्ट एशिया (West Asia) का बढ़ता तनाव
वैश्विक स्तर पर, खासकर वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे संकट ने इन लागतों के दबाव को और बढ़ा दिया है। एनर्जी मार्केट (Energy Market) में आई अस्थिरता और सप्लाई चेन (Supply Chain) में रुकावटों के कारण ट्रांसपोर्टेशन (Transportation) और कच्चे माल के आयात की लागतें बढ़ गई हैं। मैन्युफैक्चरर्स एक जटिल और अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल का सामना कर रहे हैं।
आउटपुट (Output) स्थिर, ग्रोथ का अनुमान मामूली
औसत कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilisation) लगभग 72% रहा, जो मैन्युफैक्चरर्स के बीच कुछ सावधानी का संकेत देता है। मेटल्स (Metals), टेक्सटाइल्स (Textiles) और ऑटोमोटिव (Automotive) जैसे सेक्टर्स ने उच्च दर पर काम किया, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics) और कैपिटल गुड्स (Capital Goods) में यह दर कम देखी गई। कुल मिलाकर, अधिकांश इंडस्ट्रीज Q4 FY26 में 5-10% की मामूली ग्रोथ की उम्मीद कर रही हैं, जिसमें केमिकल्स (Chemicals) और फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals) सेक्टर मजबूत गेन्स का अनुमान लगा रहे हैं।
निवेश स्थिर, हायरिंग (Hiring) में सुगबुगाहट
लागतों के बढ़ते दबाव के बावजूद, कंपनियां अगले छह महीनों में निवेश के स्तर को स्थिर बनाए रखने की योजना बना रही हैं। हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, ट्रेड रिस्ट्रिक्शन्स (Trade Restrictions) और ऑपरेशनल हर्डल्स (Operational Hurdles) के कारण विस्तार की योजनाएं थोड़ी थम गई हैं। हायरिंग सेंटीमेंट (Hiring Sentiment) में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है, जहां 41% उत्तरदाताओं ने अगले तीन महीनों में अपनी वर्कफोर्स (Workforce) को बढ़ाने की योजना बनाई है, जो पिछले 38% से ज्यादा है।
