AC Shortage Alert: गर्मी में Air Conditioner की किल्लत का खतरा? Import पर रोक, मांग बढ़ी!

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
AC Shortage Alert: गर्मी में Air Conditioner की किल्लत का खतरा? Import पर रोक, मांग बढ़ी!
Overview

भारत के एप्लायंस (Appliance) सेक्टर पर एक नई मुसीबत आ गई है। भीषण गर्मी की वजह से Air Conditioner (AC) और रेफ्रिजरेटर की डिमांड (Demand) तेजी से बढ़ रही है, लेकिन कंपोनेंट (Component) यानी कम्प्रेसर (Compressor) की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) द्वारा इंपोर्ट (Import) पर लगाई गई नई पाबंदियों से कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, खासकर तब जब घरेलू उत्पादन (Domestic Production) अभी काफी कम है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

इंपोर्ट पर पाबंदियों से कैसे बढ़ी चिंता?

DPIIT ने कम्प्रेसर के इंपोर्ट पर नई रोक लगा दी है, ठीक उस समय जब भारत में गर्मी अपने चरम पर है और AC व रेफ्रिजरेटर की डिमांड (Demand) रिकॉर्ड तोड़ रही है। सरकार का मकसद डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग (Domestic Manufacturing) को बढ़ावा देना और विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) बचाना है। लेकिन, इस फैसले से कंपनियों के लिए सप्लाई चेन (Supply Chain) मैनेज करना मुश्किल हो गया है।

8 मई 2026 से लागू हुई इस पॉलिसी के तहत, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के लिए कम्प्रेसर के इंपोर्ट की सीमा तय कर दी गई है। दो टन तक के यूनिट्स, जो मार्केट का 85% हिस्सा हैं, उनके लिए रेफ्रिजरेटर के लिए FY25 वॉल्यूम का 40% और AC के लिए 30% तक ही इंपोर्ट की अनुमति होगी। दो टन से ऊपर की कैपेसिटी (Capacity) वाले यूनिट्स के लिए 90% तक इंपोर्ट संभव है। यह कोटा सिस्टम उन कंपनियों को फायदा पहुंचाएगा जिन्होंने पहले ज्यादा इंपोर्ट किया था।

घरेलू उत्पादन और सप्लाई का गणित

इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस पॉलिसी से सप्लाई में कमी आ सकती है। फिलहाल, भारत अपनी AC कम्प्रेसर की जरूरत का करीब 50% और रेफ्रिजरेटर कम्प्रेसर का 60% हिस्सा ही घरेलू स्तर पर बना पाता है। इसके अलावा, नए लोकल कंपोनेंट्स (Local Components) को अप्रूव (Validate) होने में छह महीने तक का समय लग सकता है। इसका मतलब है कि कंपनियां तुरंत डोमेस्टिक सप्लायर (Domestic Supplier) पर स्विच नहीं कर सकतीं।

अप्रैल के आखिर में AC की बिक्री में 20-25% की बढ़ोतरी देखी गई थी। ऐसे में, सप्लाई की कमी की मार पड़ सकती है। भारत में AC कम्प्रेसर की सालाना डिमांड करीब 1.5 करोड़ यूनिट्स है, जबकि घरेलू उत्पादन सिर्फ 70-80 लाख यूनिट्स है। रेफ्रिजरेटर के लिए भी मांग 1.45-1.5 करोड़ यूनिट्स के मुकाबले उत्पादन 85-90 लाख यूनिट्स है। दो टन से ऊपर के कम्प्रेसर का डोमेस्टिक उत्पादन न के बराबर है।

GMCC और Highly जैसी बड़ी ग्लोबल कम्प्रेसर निर्माता कंपनियां भारत में काम करती हैं, वहीं LG Electronics और Daikin जैसी कंपनियां भी यहीं उत्पादन करती हैं। लेकिन, इंपोर्ट पर निर्भरता काफी ज्यादा है, जिसमें करीब 66% कम्प्रेसर चीन से आते हैं।

LG, Daikin और Mitsubishi Electric जैसी कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और लोकल सोर्सिंग (Local Sourcing) पर भारी निवेश कर रही हैं। हालांकि, कम्प्रेसर मैन्युफैक्चरिंग में पूरी तरह आत्मनिर्भर (Self-sufficient) होने में 2028 के अंत तक का समय लग सकता है। सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत ₹10,478 करोड़ का निवेश इस गैप को पाटने की कोशिश कर रहा है। इसके बावजूद, लोकल वैल्यू एडिशन (Local Value Addition) अभी भी सिर्फ 15-20% है।

क्या ग्राहकों पर बढ़ेगा बोझ?

DPIIT की यह इंपोर्ट रोक, डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के इरादे से लाई गई है, लेकिन इससे मार्केट की स्टेबिलिटी (Stability) और कॉम्पिटिशन (Competition) पर असर पड़ सकता है। यह नियम उन कंपनियों को फायदा पहुंचा सकता है जिन्होंने इंपोर्ट को लेकर ज्यादा कंजर्वेटिव (Conservative) रणनीति अपनाई थी।

जो कंपनियां बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) या डोमेस्टिक सप्लायर के साथ साझेदारी पर ध्यान नहीं दे पाईं, उन्हें मौजूदा मांग को पूरा करने में दिक्कत हो सकती है। अगर लोकल सप्लाई उपलब्ध भी हो, तो नए कंपोनेंट के अप्रूवल की छह महीने की अनिवार्य अवधि एक बड़ी रुकावट है। यह इनफ्लेक्सिबिलिटी (Inflexibility) और अपर्याप्त डोमेस्टिक कैपेसिटी (Domestic Capacity) के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका बोझ आखिर में ग्राहकों पर पड़ेगा। या फिर, मांग पूरी न होने से कंपनियों को बिक्री का नुकसान उठाना पड़ेगा।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.