फरवरी में निर्यात बढ़ा, पर चुनौतियां भी हावी
फरवरी 2026 के ये नतीजे भारतीय इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट्स के लिए एक बड़ी राहत लेकर आए, जो 13% की उछाल के साथ $10.36 बिलियन पर पहुंच गए। यह कमाल 25 अहम एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन में से 17 में मजबूत मांग के चलते हुआ। लेकिन, मौजूदा हालात, खासकर वेस्ट एशिया संकट से पैदा हुए सप्लाई चेन के दबाव और लागत में बढ़ोतरी, इस सकारात्मक मोमेंटम पर भारी पड़ सकती है।
शिपिंग लागत का बोझ और बढ़ा
दरअसल, एक्सपोर्टर्स को अब सामान भेजने के लिए भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ रही है। शिपिंग कंपनियों ने वॉर-रिस्क सरचार्ज (War-Risk Surcharge) और इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (Emergency Conflict Surcharge) लगाने शुरू कर दिए हैं। Hapag-Lloyd जैसी कंपनियां प्रति TEU $1,500 तक का सरचार्ज वसूल रही हैं। इससे सामान की लागत (Landed Cost) काफी बढ़ गई है। मध्य पूर्व (Middle East) के संघर्ष वाले इलाकों से बचने के लिए जहाजों को केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) से घुमाकर भेजना पड़ रहा है, जिसमें दो हफ्ते तक ज्यादा लगते हैं और फ्यूल की खपत भी बहुत बढ़ जाती है। इस वजह से प्रमुख ट्रेड रूट्स पर फ्रेट रेट्स (Freight Rates) आसमान छू रहे हैं। ग्लोबल कंटेनर शिपिंग मार्केट 'वेरी हाई प्रेशर' (Very High Pressure) जोन में चला गया है, और फ्रेट रेट्स तेजी से बढ़ रहे हैं। इन सबके अलावा, एनर्जी प्राइस (Energy Prices) में भी भारी उछाल आया है, जिससे कच्चा तेल $90 प्रति बैरल के पार चला गया और प्रमुख पोर्ट्स पर बंकर फ्यूल (Bunker Fuel) के दाम करीब 50% तक बढ़ गए हैं। ये बढ़ी हुई लागत एक्सपोर्टर्स की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) और कॉम्पिटिटिवनेस (Competitiveness) पर सीधा असर डाल रही है।
प्रमुख बाजारों में प्रदर्शन मिला-जुला
हालांकि, कुल मिलाकर निर्यात बढ़ा है, लेकिन प्रमुख बाजारों में प्रदर्शन मिला-जुला रहा। अमेरिका, जो भारत का सबसे बड़ा मार्केट है, वहां फरवरी में निर्यात 4.9% घटकर $1.57 बिलियन रह गया। दूसरे बड़े बाजार, UAE में भी 14% की गिरावट आई और यह $591.93 मिलियन पर आ गया। वहीं, दूसरी तरफ चीन को इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट्स दोगुने से भी ज्यादा हो गए और यह $436.18 मिलियन पर पहुंच गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह $207.45 मिलियन थे। चीन से मांग में आई यह भारी बढ़ोतरी एक बड़ा बदलाव दिखाती है, क्योंकि जहां भारत के पारंपरिक पार्टनर की मांग कमजोर पड़ रही है, वहीं एक प्रमुख प्रतिस्पर्धी चीन अपने सेक्टर्स, खासकर हाई-टेक गुड्स में, शानदार एक्सपोर्ट ग्रोथ दर्ज कर रहा है।
अंदरूनी कमजोरी और भविष्य के जोखिम
इन हेडलाइन ग्रोथ के आंकड़ों के बावजूद, भारतीय इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट्स में अंदरूनी कमजोरी दिख रही है। एक्सपोर्टर्स एक जटिल संकट का सामना कर रहे हैं: बढ़ता हुआ वॉर-रिस्क इंश्योरेंस और फ्रेट चार्ज, अस्थिर एनर्जी प्राइस, और जरूरी कच्चे माल की कमी। वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष ग्लोबल शिपिंग रूट्स के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है, जो शायद कोविड-19 महामारी के बाद का सबसे बड़ा संकट है। जहाजों को घुमाकर भेजने और लंबी यात्रा के कारण मार्जिन कम हो रहा है, जिससे भारतीय सामानों के लिए ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिशन करना मुश्किल हो रहा है।
आउटलुक चुनौतीपूर्ण
मार्च 2026 और उसके बाद का आउटलुक (Outlook) चुनौतीपूर्ण लग रहा है। EEPC India के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical Tensions) के कारण आगे का रास्ता "पथरीला" और "धुंधला" है। प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी ने वेस्ट एशिया संकट को भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बताया। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) का अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ घटकर 1.9% रह जाएगी, जिसका मुख्य कारण संघर्ष का जोखिम है। हालांकि, इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट्स पिछले फाइनेंशियल ईयर के रिकॉर्ड को पार करने की उम्मीद है, लेकिन लागत में तेजी से बढ़ोत्तरी, सप्लाई चेन की अस्थिरता और भू-राजनीतिक अस्थिरता के मौजूदा माहौल में भविष्य की ग्रोथ मुश्किल से हासिल होगी और संभवतः मार्जिन की भारी कीमत पर आएगी।