टैरिफ में बड़ी कटौती का असर
यह बड़ा बदलाव दोनों देशों के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित एक व्यापार समझौते (Trade Deal) के बाद आया है। पहले भारतीय सामानों पर 50% तक का आयात शुल्क (Import Duty) लग रहा था, जिसे अब घटाकर 18% कर दिया गया है। इस फैसले से उन भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिली है जो अमेरिकी बाज़ार पर काफी हद तक निर्भर हैं।
बेकरी सेक्टर में नई जान
Mrs. Bectors Food Specialities जैसी बिस्कुट और कुकीज़ बनाने वाली कंपनियां इस फैसले से सबसे ज़्यादा उत्साहित हैं। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अनूप बेक्टर का मानना है कि इस टैरिफ कटौती से अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट्स अगले दो साल में तीन गुना तक बढ़ सकते हैं। पहले टैरिफ की अनिश्चितता के चलते कंपनी की नई प्रोडक्शन फैसिलिटी, जो इंदौर में है, अब पूरी क्षमता से काम शुरू करने के लिए तैयार है। कंपनी को पहले अपने रेवेन्यू का 5% से 7% तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसे वे डिस्काउंट देकर कम करने की कोशिश कर रहे थे। Mrs. Bectors Food Specialities का मार्केट कैप करीब ₹4,500 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो लगभग 45 के आसपास है।
चाय और टेक्सटाइल सेक्टर को भी बम्पर फायदा
भारतीय ऑर्थोडॉक्स (Orthodox) और स्पेशियलिटी चाय को भी अब अमेरिकी बाज़ार में एक बड़ा प्राइस एडवांटेज मिलेगा। जहाँ श्रीलंका पर 25% और केन्या पर 10% टैरिफ है, वहीं चीन पर 33-35% का शुल्क है। ऐसे में, भारत की चाय सबसे किफ़ायती प्रीमियम विकल्प बनकर उभरेगी। यह भारतीय चाय बागानों के लिए ग्रीन और ऊलोंग (Oolong) जैसी वैरायटीज़ में उत्पादन बढ़ाने और प्रीमियम मार्केट में अपनी पकड़ मज़बूत करने का एक ऐतिहासिक मौका है।
टेक्सटाइल और लेदर इंडस्ट्री को भी इससे ज़बरदस्त फायदा होगा। Texport Industries और आगरा की लेदर फुटवियर निर्माता Puran Dawar जैसी कंपनियों को पहले अपने प्रोडक्ट्स पर 15-18% तक का डिस्काउंट देना पड़ रहा था। टैरिफ में यह कमी सीधे तौर पर उनके प्रॉफिट मार्जिन को बढ़ाएगी और कर्मचारियों की छंटनी जैसे ख़तरों को भी कम करेगी।
चुनौतियां और आगे का रास्ता
हालांकि, कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। बेकरी प्रोडक्ट्स के लिए ड्यूटी-फ्री एक्सेस की पूरी लिस्ट अभी आनी बाकी है, जिससे कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही, 18% का नया टैरिफ भी एक लागत (Cost) है जिसे एक्सपोर्टर्स को मैनेज करना होगा। कुछ कंपनियां, जैसे KM Knitwear, नए ऑर्डर्स पर 3% से 4% तक की प्राइस इंक्रीज़ की मांग कर सकती हैं, जो खरीदारों के साथ मोलभाव (Negotiation) का विषय बन सकता है। इन एक्सपोर्टर्स की ग्रोथ काफी हद तक अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों (Bilateral Relations) और आगे किसी भी तरह के भू-राजनीतिक (Geopolitical) उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी।
भविष्य की उम्मीदें
कुल मिलाकर, उद्योग जगत को उम्मीद है कि यह टैरिफ कटौती भारतीय एक्सपोर्ट्स में एक मज़बूत वापसी लाएगी। अमेरिकी खरीदार अपना काम फिर से शुरू कर रहे हैं, जिससे पेंडिंग ऑर्डर्स की पुष्टि होने की उम्मीद है। इस राहत से उन फैक्टरीज़ में रोज़गार भी सुरक्षित होंगे जो पहले बंद होने के कगार पर थे। Mrs. Bectors Food Specialities का अगले दो साल में एक्सपोर्ट्स को तीन गुना करने का लक्ष्य कंपनी के आत्मविश्वास को दर्शाता है, वहीं चाय सेक्टर के लिए यह प्रीमियम सप्लायर के तौर पर अपनी पहचान बनाने का सुनहरा अवसर है। टेक्सटाइल और लेदर इंडस्ट्रीज़ भी अपने एक्सपोर्ट वॉल्यूम को फिर से बढ़ाने और लाभप्रदता (Profitability) हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।