सरकारी सहयोग से कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा निवेश
'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों को ज़बरदस्त बल मिल रहा है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में तेज़ी देखी जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ECMS के तहत 75 प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दिखाई है, जिनकी कुल वैल्यू ₹61,671 करोड़ है। यह स्कीम के ₹59,350 करोड़ के लक्ष्य से कहीं ज़्यादा है। इस मंज़ूरी के बाद, Dixon Display डिस्प्ले मॉड्यूल सब-असेंबली के लिए ₹1,100 करोड़ का भारी निवेश करेगी, जबकि Syrma Strategic Electronics लैमिनेट और फ्लेक्सिबल PCB मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹588 करोड़ का निवेश करने की योजना बना रही है। इन निवेशों के ज़रिए, खासकर Dixon Technologies (मार्केट कैप ₹60,925 करोड़, P/E 37.85x) और Syrma SGS Technology (मार्केट कैप ₹15,777 करोड़, P/E 54.6x) जैसी कंपनियों का सरकारी नीतियों पर भरोसा साफ़ नज़र आ रहा है।
PLI स्कीम का तालमेल और भारत का वैश्विक दबदबा
ECMS स्कीम, प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम की सफलता पर आधारित है, जिसने 2021 के बाद से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 146% की अभूतपूर्व बढ़ोतरी की है। इस रणनीति के चलते भारत मोबाइल फोन का नेट इम्पोर्टर से नेट एक्सपोर्टर बन गया है। इन संयुक्त नीतियों का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक विभिन्न PLI सेक्टर्स में ₹2.16 लाख करोड़ के निवेश को आकर्षित करना है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर अब वैश्विक सप्लाई चेन्स के लिए एक प्रमुख विकल्प के रूप में उभर रहा है, जो 'चाइना+1' रणनीति का लाभ उठा रहा है। दक्षिण कोरिया जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब भी वैश्विक अनिश्चितताओं और प्रतिद्वंद्विता के बीच अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए अपनी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। भारत का लक्ष्य $300 बिलियन का इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन इकोसिस्टम विकसित करना और खुद को एक रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है।
मैन्युफैक्चरिंग लागत और प्रतिस्पर्धा की चिंताएं
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के बावजूद, इस रणनीति में कुछ अंतर्निहित जोखिम भी हैं। Syrma SGS Technology का P/E रेश्यो (54.6x से 77.5x) आईटी सेक्टर के औसत (30.2x) की तुलना में काफी ज़्यादा है। वहीं, Dixon Technologies का P/E रेश्यो (37.85x) 10-साल के मीडियन से कम है, लेकिन हार्डवेयर इंडस्ट्री के मीडियन (27.42x) से अब भी ऊपर है। यह दर्शाता है कि निवेशक सरकारी इंसेंटिव से प्रेरित होकर भविष्य में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। इसके अलावा, भारत में मैन्युफैक्चरिंग लागत, खासकर मोबाइल उत्पादन के लिए, चीन की तुलना में 11-14% अधिक है। इंसेंटिव पर अत्यधिक निर्भरता कंपनियों के लिए सब्सिडी खत्म होने के बाद लागत और दक्षता पर प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल बना सकती है, खासकर स्थापित वैश्विक खिलाड़ियों के मुकाबले। दक्षिण कोरिया द्वारा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में किए जा रहे भारी निवेश के मद्देनज़र, भारत को लंबे समय तक बाज़ार हिस्सेदारी सुरक्षित करने के लिए वास्तविक नवाचार और लागत प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना होगा।
विश्लेषकों की उम्मीदें और आगे की राह
विश्लेषकों का नज़रिया आम तौर पर सकारात्मक बना हुआ है। Dixon Technologies के पास 'मॉडरेट बाय' (Moderate Buy) की कंसेंसस रेटिंग है, जिसके औसत प्राइस टारगेट ₹13,000-₹15,880 हैं, जो संभावित अपसाइड दर्शाते हैं। Syrma SGS Technology को कई विश्लेषकों से 'स्ट्रॉन्ग बाय' (Strong Buy) की रेटिंग मिली है, जिसके प्राइस टारगेट ₹953 से ₹1,050 तक हैं, जो महत्वपूर्ण अपसाइड क्षमता का संकेत देते हैं। इन पूर्वानुमानों के पीछे सरकार की नीतियों पर लगातार ध्यान, PLI और ECMS जैसी स्कीमों की सफलता, और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की रणनीतिक स्थिति जैसे कारक हैं। निरंतर विकास के लिए यह ज़रूरी होगा कि यह क्षेत्र घरेलू वैल्यू चेन्स को गहरा करे और वर्तमान नीतिगत प्रोत्साहन से परे लागत प्रतिस्पर्धा हासिल करे।