India Electronics Sector: महिलाओं की बंपर Hiring, पर इन बड़ी Challenges से जूझ रहा है Industry!

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Electronics Sector: महिलाओं की बंपर Hiring, पर इन बड़ी Challenges से जूझ रहा है Industry!
Overview

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग Sector में एक बड़ा बदलाव आया है। यहां महिलाओं की Hiring अब पुरुषों से ज़्यादा, यानी **54%** तक पहुंच गई है। इसकी मुख्य वजह स्किल्ड कैंडिडेट की उपलब्धता और कंपनियों का महिलाओं की बारीकी, अनुशासन और कम एब्सेंटीज्म जैसी खूबियों को महत्व देना है। Foxconn और Tata Electronics जैसी बड़ी कंपनियाँ, खासकर दक्षिण भारत में, महिलाओं को बड़ी संख्या में हायर कर रही हैं।

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महिलाओं की स्किल का दिख रहा असर

टीमलीज (TeamLease) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग Sector में महिलाओं की एम्प्लॉयबिलिटी 54% तक पहुंच गई है, जो पुरुषों की 51.5% की दर से ज़्यादा है। इसका श्रेय महिलाओं के बेहतर ट्रेनिंग परफॉर्मेंस और फैक्ट्री फ्लोर की नौकरियों के लिए आवश्यक स्किल्स को दिया जा रहा है। Employer, महिलाओं को उनकी मैनुअल स्किल्स, विश्वसनीयता और प्रोडक्शन स्टेप्स को ध्यान से फॉलो करने की क्षमता के कारण ज़्यादा तरजीह दे रहे हैं। इन खूबियों के चलते एब्सेंटिज्म (गैर-हाजिरी) और वर्कर टर्नओवर (कर्मचारियों का छोड़ना) कम होता है, जिससे एक स्थिर वर्कफोर्स तैयार होती है। स्मार्टफोन असेंबली जैसे कामों में, जहाँ कुछ एरिया में 90% तक वर्कफोर्स महिलाएँ हैं, यह स्थिरता महत्वपूर्ण है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसे सरकारी सपोर्ट से Sector की ग्रोथ बढ़ी है, जिसने 13.3 लाख से ज़्यादा नौकरियां पैदा की हैं, जिनमें से कई महिलाओं को मिली हैं।

साउथ इंडिया में महिला Hiring का बोलबाला, नॉर्थ पीछे

यह बढ़त पूरे देश में एक समान नहीं है, और विभिन्न क्षेत्रों में बड़े अंतर देखने को मिलते हैं। साउथ इंडिया, खासकर तमिलनाडु और कर्नाटक, इस मामले में सबसे आगे हैं। Foxconn और Tata Electronics जैसी प्रमुख कंपनियाँ इस ट्रेंड को आगे बढ़ा रही हैं। इन कंपनियों ने चीन के सफल मॉडल को अपनाते हुए ऑन-साइट पूरी सुविधाएँ दी हैं, जैसे सुरक्षित आवास, भोजन और ट्रांसपोर्ट। इससे इन कैम्पस में 80% से ज़्यादा वर्कफोर्स महिलाएँ हैं। इसके विपरीत, नॉर्थ इंडिया में महिला Hiring का प्रतिशत बहुत कम, अक्सर 25-30% के आसपास रहता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वहाँ इस तरह के इंटीग्रेटेड कैम्पस सेटअप की कमी है, जिससे पेरेंट्स को सुरक्षा और आवास को लेकर चिंताएं रहती हैं। यह कंसंट्रेशन दिखाता है कि Sector बड़े पैमाने पर महिला श्रमिकों को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए इन विशिष्ट सेटअपों पर निर्भर है, जिससे देश भर में व्यापक समावेशी विकास सीमित हो रहा है।

Attrition और इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी चुनौतियाँ

अच्छे Hiring नंबर्स के बावजूद, कई बड़ी स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम्स इस ग्रोथ की लॉन्ग-टर्म सफलता और इंक्लूसिविटी को खतरे में डाल रही हैं। एक मुख्य समस्या वर्कर टर्नओवर (Attrition) की है, जहाँ लगभग 43% प्रशिक्षित महिलाएँ देखभाल की ज़िम्मेदारियों को संभालने के लिए नौकरी छोड़ देती हैं। एम्प्लॉयर्स द्वारा चाइल्डकैअर सुविधाओं की कमी इस समस्या को और बढ़ाती है। हालाँकि मेटर्निटी बेनिफिट (अमेंडमेंट) एक्ट 2017 के तहत बड़े एम्प्लॉयर्स के लिए क्रेच (बच्चों के लिए डे-केयर) सेवाएं देना ज़रूरी है, लेकिन इसका व्यापक रूप से लागू होना अभी भी मुश्किल है। सुरक्षा चिंताएँ भी महिलाओं को मैन्युफैक्चरिंग सेंटर्स में जाने से रोकती हैं, खासकर उन इलाकों में जहाँ सुरक्षित आवास और ट्रांसपोर्ट की कमी है। मैन्युफैक्चरिंग Sector में एक महत्वपूर्ण स्किल गैप भी बना हुआ है, जो Tata Electronics और Foxconn जैसी तेज़ी से बढ़ रही कंपनियों को भी प्रभावित कर रहा है। वर्कर मोबिलिटी का सीमित होना, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों में उच्च आवास लागत का सामना करने वाली महिलाओं के लिए, Sector को अपनी बढ़ती महिला वर्कफोर्स का पूरी तरह से उपयोग करने से रोकता है। वैश्विक स्तर पर, भारत के मैन्युफैक्चरिंग Sector में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 31.9% है, जो वियतनाम (55.1%) और थाईलैंड (48.7%) जैसे देशों से पीछे है।

भविष्य की ग्रोथ के लिए क्या है ज़रूरी?

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग Sector 2030 तक 610 बिलियन डॉलर से ज़्यादा के आउटपुट के साथ महत्वपूर्ण ग्रोथ के लिए तैयार है। इस ग्रोथ को डोमेस्टिक डिमांड, इम्पोर्ट सब्स्टिट्यूशन के प्रयास और PLI स्कीम जैसे सरकारी प्रोत्साहन से बल मिलेगा। बड़ी कंपनियाँ अपनी ऑपरेशंस का विस्तार कर रही हैं और नई नौकरियाँ पैदा करने की योजना बना रही हैं। लेकिन इस महत्वाकांक्षी ग्रोथ को हासिल करने के लिए मुख्य स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम्स को हल करना ज़रूरी है। स्किल गैप्स को भरना, सभी के लिए सुरक्षित कार्यस्थल और आवास प्रदान करना, और मजबूत चाइल्डकैअर सपोर्ट स्थापित करना अनिवार्य है। इन बुनियादी नींवों के बिना, Sector को लगातार लेबर शॉर्टेज और उच्च Attrition का सामना करना पड़ सकता है, जिससे इसकी इंक्लूसिव और सस्टेनेबल इकोनॉमिक कॉन्ट्रिब्यूशन की क्षमता सीमित हो जाएगी। वर्तमान मॉडल की कुछ क्षेत्रों पर निर्भरता को बदलकर देश भर में व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना होगा।

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