भारत में EV बैटरी की मांग रॉकेट पर! 2032 तक **10 गुना** उछाल का अनुमान

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारत में EV बैटरी की मांग रॉकेट पर! 2032 तक **10 गुना** उछाल का अनुमान
Overview

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी की मांग आने वाले सालों में **10 गुना** तक बढ़ने वाली है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, **2032** तक यह मांग बढ़कर **200 GWh** तक पहुंच सकती है, जिससे भारत एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर उभरेगा।

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मांग में जबरदस्त उछाल, बनेगा ग्लोबल हब

इंडियन एनर्जी अलायंस (IESA) की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में EV बैटरी की मांग 2025 में लगभग 20 GWh से बढ़कर 2032 तक 200 GWh के आंकड़े को छू सकती है। यह जबरदस्त ग्रोथ घरेलू प्रोडक्शन में बड़े निवेश को आकर्षित करेगी और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत स्थिति दिलाएगी।

टेक्नोलॉजी और सरकारी नीतियों का सपोर्ट

इस ग्रोथ का एक बड़ा कारण सरकार की नीतियां जैसे FAME II और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम हैं, जो डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही हैं। साथ ही, बैटरी टेक्नोलॉजी में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरी सुरक्षा, लंबी लाइफ और कम लागत के कारण ज्यादा पॉपुलर हो रही हैं, जो भारत के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। इसके अलावा, लिथियम मैंगनीज आयरन फॉस्फेट (LMFP), सोडियम-आयन और सॉलिड-स्टेट जैसी नई टेक्नोलॉजी पर भी काम चल रहा है। अनुमान है कि 2030 तक यह मार्केट $19 बिलियन से ज्यादा का हो सकता है।

राह में हैं कुछ चुनौतियां

हालांकि, इस रास्ते में कुछ चुनौतियां भी हैं। बैटरी सेल और एडवांस्ड सेमीकंडक्टर जैसे कंपोनेंट्स का पूरा लोकलाइजेशन (स्थानीय उत्पादन) अभी महंगा और टेक्निकल रूप से मुश्किल है। भारत अभी भी काफी हद तक चीन से इंपोर्ट होने वाली लिथियम-आयन सेल पर निर्भर है, जो ग्लोबल सप्लाई में रुकावटों का खतरा पैदा करता है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, खासकर बड़े शहरों के बाहर, और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की शुरुआती ऊंची कीमत भी आम ग्राहकों के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है। LFP बैटरियों की एनर्जी डेंसिटी कम होने से कुछ गाड़ियों में रेंज की दिक्कत आ सकती है।

भविष्य में इनोवेशन से मिलेगी रफ्तार

भारत की EV बैटरी मार्केट की सफलता लोकलाइजेशन और तकनीकी प्रगति पर निर्भर करेगी। भविष्य में सोडियम-आयन और सॉलिड-स्टेट जैसी एडवांस्ड बैटरियों का विकास लागत को कम करने और परफॉरमेंस को बेहतर बनाने में मदद करेगा। यह भारत को ग्लोबल एनर्जी ट्रांजीशन में एक अहम खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.