सरकार ने नेशनल स्टील पॉलिसी 2047 का ड्राफ्ट तैयार किया है, जो 2017 की पुरानी पॉलिसी की जगह लेगी। इसमें छोटे उत्पादकों के लिए **₹5,000 करोड़** की 'विकसित भारत इस्पात' स्कीम और सस्ते आयात को रोकने के कड़े नियम शामिल हैं।
भारत सरकार ने औद्योगिक रणनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत कर दी है। स्टील सेक्रेटरी संदीप पौंड्रिक ने जानकारी दी है कि नई 'नेशनल स्टील पॉलिसी 2047' का ड्राफ्ट अगले हफ्ते पब्लिक कंसल्टेशन के लिए उपलब्ध होगा। यह नीति भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सस्टेनेबिलिटी और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर्स को ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचाने पर केंद्रित है।
छोटे उत्पादकों के लिए 'विकसित भारत इस्पात' स्कीम
इस नई पॉलिसी का सबसे मुख्य आकर्षण ₹5,000 करोड़ का बजट है, जिसे 'विकसित भारत इस्पात' स्कीम के तहत रखा गया है। यह योजना मुख्य रूप से छोटे और मध्यम (MSME) स्टील उत्पादकों के लिए है, ताकि वे कार्बन एमिशन कम कर सकें। छोटे प्लेयर्स के लिए क्लीन एनर्जी या रॉ मटेरियल शिफ्ट करने का खर्च एक बड़ी चुनौती होता है, जिसे सरकार अपनी इस स्कीम के जरिए कम करना चाहती है।
आयात पर सख्त लगाम और मॉडर्नाइजेशन
घरेलू मार्केट में आने वाले घटिया और सस्ते स्टील को रोकने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। मंत्रालय एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-dumping duty) जैसे सख्त उपाय लागू करने पर विचार कर रहा है ताकि लोकल कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन सुरक्षित रहे। इसके अलावा, पॉलिसी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है, जिससे प्रोडक्शन की क्वालिटी और एफिशिएंसी को बेहतर बनाया जा सके।
निवेशकों के लिए बड़ी बातें
इस पूरी पॉलिसी का असर Tata Steel, JSW Steel और Jindal Steel and Power जैसे बड़े खिलाड़ियों पर भी पड़ेगा। निवेशकों को खास तौर पर यह देखना होगा कि आने वाले समय में इम्पोर्ट ड्यूटी को लेकर क्या नियम तय होते हैं और ग्रीन इंसेंटिव स्कीम छोटे प्लेयर्स के लिए कितनी प्रभावी साबित होती है।
