भारत का साउथ कोरिया को अल्टीमेटम: स्टील डील बनेगा हथियार, पियूष गोयल बोले- 'असमान व्यापार बंद करो!'

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AuthorMehul Desai|Published at:
भारत का साउथ कोरिया को अल्टीमेटम: स्टील डील बनेगा हथियार, पियूष गोयल बोले- 'असमान व्यापार बंद करो!'
Overview

भारत साउथ कोरिया के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को फिर से परिभाषित करने की मांग कर रहा है। वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने स्पष्ट कहा है कि मौजूदा 'कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CEPA) भारत के लिए ठीक नहीं है और इसे तुरंत असंतुलित व्यापार को ठीक करने की जरूरत है। इस बीच, JSW Steel और POSCO के बीच **₹35,000 करोड़** के बड़े स्टील प्लांट के निवेश को भारत, साउथ कोरिया से बेहतर मार्केट एक्सेस (Market Access) के लिए एक महत्वपूर्ण 'लिवरेज' (leverage) के तौर पर इस्तेमाल करने की रणनीति बना रहा है।

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भारत का सख्त रुख

भारत सरकार अब 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे नारों को मजबूत करते हुए, विदेशी व्यापार में बराबरी और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। अब फोकस सिर्फ व्यापार बढ़ाने पर नहीं, बल्कि ऐसे समझौते करने पर है जिनसे भारत को भी उतना ही फायदा हो, खासकर मार्केट एक्सेस (Market Access) और स्थानीय वैल्यू एडिशन (Value Addition) के मामले में।

CEPA पर बड़ा सवाल

वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने साउथ कोरिया के साथ हुए मौजूदा 'कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CEPA) को 'ठीक से न किया गया और भारत के खिलाफ झुका हुआ' करार दिया है। 2010 में हुए इस समझौते के बाद से भारत और साउथ कोरिया के बीच व्यापार तो बढ़ा है, लेकिन भारत का इंपोर्ट (आयात) साउथ कोरिया के एक्सपोर्ट (निर्यात) के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ा है, जिससे ट्रेड घाटा (Trade Deficit) लगातार बढ़ रहा है। भारत सरकार इस 2010 के CEPA को पुराना मानती है। 2015 में इसकी री-नेगोशिएशन (पुन: बातचीत) शुरू हुई थी, जिसके अब तक ग्यारह राउंड हो चुके हैं। उम्मीद है कि 2027 के मध्य तक यह बातचीत पूरी हो जाएगी और एक नया, संतुलित समझौता सामने आएगा।

स्टील डील से कैसे बदलेगी तस्वीर?

भारत अब बड़े इंडस्ट्रियल निवेश को अपनी शर्तों पर व्यापारिक छूट पाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इसी कड़ी में, भारत की JSW Steel और साउथ कोरिया की दिग्गज स्टील कंपनी POSCO मिलकर ओडिशा में एक नया स्टील प्लांट लगाने जा रहे हैं। इस 50:50 जॉइंट वेंचर (Joint Venture) में ₹35,000 करोड़ का भारी-भरकम निवेश होगा। यह सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जहाँ वह साउथ कोरिया से बेहतर मार्केट एक्सेस (Market Access) और स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की मांग कर रहा है। POSCO अपनी टेक्नोलॉजी और ग्लोबल अनुभव देगी, वहीं JSW Steel भारत में अपने बड़े नेटवर्क और क्षमता का इस्तेमाल करेगी।

बाजार में बनी हुई हैं रुकावटें

हालांकि, भारत ने अपना बाजार साउथ कोरिया के लिए खोला है, लेकिन अभी भी ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और एग्रीकल्चर जैसे कुछ प्रमुख सेक्टर में भारतीय कंपनियों के लिए रुकावटें बनी हुई हैं। इन ट्रेड बैरियर्स (Trade Barriers) की वजह से ही भारत का ट्रेड घाटा बढ़ रहा है। आने वाली री-नेगोशिएशंस का मुख्य एजेंडा इन्हीं बाधाओं को दूर करना है।

जोखिम और आगे की राह

साउथ कोरिया से व्यापार में असली बराबरी हासिल करना आसान नहीं होगा। इसके लिए साउथ कोरिया को संवेदनशील इलाकों में छूट देनी होगी, जो पिछले अनुभवों के आधार पर मुश्किल रहा है। ₹35,000 करोड़ के JSW-POSCO प्लांट जैसे बड़े प्रोजेक्ट में देरी या लागत बढ़ने जैसे सामान्य जोखिम तो हैं ही। अगर साउथ कोरिया अपनी पुरानी 'अनुचित व्यापारिक चालों' (predatory practices) से बाज नहीं आया, तो भविष्य में ट्रेड डिस्प्यूट्स (Trade Disputes) हो सकते हैं और यह साझेदारी भी प्रभावित हो सकती है। भारत सरकार का जोर अब ऐसे ही द्विपक्षीय समझौतों पर है जो दोनों देशों के लिए 'विन-विन' (win-win) सिचुएशन बनाएं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.