रक्षा बजट रिकॉर्ड पर, पर फौजों का आधुनिकीकरण धीमा? चौंकाने वाले आंकड़े!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
रक्षा बजट रिकॉर्ड पर, पर फौजों का आधुनिकीकरण धीमा? चौंकाने वाले आंकड़े!
Overview

भारत का रक्षा बजट रिकॉर्ड तोड़ रहा है, FY27 तक यह **₹7.85 लाख करोड़** तक पहुंचने का अनुमान है। यह FY16 के मुकाबले **219%** की भारी बढ़ोतरी है। लेकिन, इस बजट में एक चिंताजनक ट्रेंड दिख रहा है - रक्षा आधुनिकीकरण के लिए ज़रूरी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) का हिस्सा पिछले एक दशक में लगभग **34.91%** से घटकर **28%** हो गया है।

बजट बढ़ा, पर फोकस बदला?

भारत का रक्षा बजट तेजी से बढ़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए यह ₹7.85 लाख करोड़ के बजट अनुमान तक पहुंच सकता है, जो कि फाइनेंशियल ईयर 2016 (FY16) के ₹2.46 लाख करोड़ के मुकाबले 219% की जबरदस्त बढ़ोतरी दिखाता है। यह हाल के वर्षों में, खासकर 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद, रक्षा आधुनिकीकरण पर भारत के बढ़ते जोर को दर्शाता है। बजट आवंटन में फाइनेंशियल ईयर 2022 और FY27 के बीच कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) करीब 11% रहा, जो FY16 से FY20 के 7.19% CAGR से काफी अधिक है। असल में, रक्षा खर्च अक्सर शुरुआती बजट अनुमानों से ज्यादा होता रहा है, जैसे FY22 में रिवाइज्ड एस्टीमेट्स बजट से थोड़े ज्यादा थे, और FY23 का बजट अनुमान काफी बढ़ाया गया था। यह फंड के बेहतर इस्तेमाल और प्रोक्योरमेंट में तेजी का संकेत देता है।

कैपिटल एक्सपेंडिचर: आंकड़ों में उछाल, पर हिस्सेदारी में गिरावट

विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा खर्च में यह बढ़ोतरी मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप है। कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) के लिए आवंटन, जिससे नए हथियार, लड़ाकू विमान और प्लेटफॉर्म खरीदे जाते हैं, FY27 तक बढ़कर ₹2.19 लाख करोड़ होने का अनुमान है, जो FY16 में ₹85,000 करोड़ था। हालांकि यह आंकड़ों में एक बड़ी बढ़त है, लेकिन चिंता की बात यह है कि कुल रक्षा खर्च में Capex का हिस्सा पिछले दशक में करीब 34.91% से घटकर 28% रह गया है। यह तब हो रहा है जब भारत दो परमाणु-शक्ति वाले पड़ोसियों से निपटने के लिए एक जटिल सुरक्षा माहौल का सामना कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय तुलना और GDP का बोझ

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो, भारत का रक्षा खर्च सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 1.9% से 2.27% के बीच है, जो अमेरिका और रूस जैसे प्रमुख देशों के 3% से अधिक के खर्च की तुलना में कम है। कुछ विशेषज्ञों और संसदीय समितियों ने भारत की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए GDP के 2.5% से 3% तक के खर्च का सुझाव दिया है। वहीं, चीन का रक्षा बजट 2020-2024 के बीच अनुमानित $318 बिलियन रहा है, जो भारत के बजट से लगभग चार गुना है। यह अंतर, भारत में Capex के घटते अनुपात के साथ मिलकर, सैन्य आधुनिकीकरण की गति पर सवाल खड़े करता है।

रेवेन्यू एक्सपेंडिचर का दबदबा और देरी का डर

रक्षा बजट में एक बड़ा असंतुलन रेवेन्यू एक्सपेंडिचर और कैपिटल एक्सपेंडिचर के बीच है। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर, जिसमें वेतन, पेंशन और परिचालन लागत शामिल है, बजट का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 71%, ले लेता है। पेंशन का बढ़ता बोझ एक बड़ी चिंता है। Capex के लिए फंड के घटते अनुपात का मतलब है कि अत्याधुनिक हथियारों और प्लेटफार्मों की खरीद में बाधा आ सकती है। इतिहास गवाह है कि प्रमुख प्रोक्योरमेंट डील्स में देरी हुई है, जैसे राफेल लड़ाकू विमान की खरीद की जरूरत एक दशक पहले से थी, लेकिन अब ₹3.25 लाख करोड़ की लागत से 114 Rafale विमानों की खरीद को मंजूरी मिली है। यह देरी, खरीद प्रक्रियाओं में सिस्टमैटिक मुद्दों को उजागर करती है।

भविष्य की राह: आधुनिकीकरण और 'आत्मनिर्भर भारत'

भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की ओर तेजी से बढ़ रही है। 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना महत्वपूर्ण है। हालांकि, सतत आधुनिकीकरण कैपिटल एक्सपेंडिचर के घटते हिस्से की चुनौती से पार पाने पर निर्भर करेगा। FY27 के लिए Capex में अनुमानित वृद्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे समग्र बजट के रुझान और सामरिक जरूरतों के आलोक में देखा जाना चाहिए। खरीद बाधाओं को दूर करना, अनुसंधान एवं विकास (R&D) में पर्याप्त निवेश सुनिश्चित करना और कैपिटल एसेट्स को प्राथमिकता देना, उभरते भू-राजनीतिक परिदृश्य में देश की रक्षा क्षमताओं को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

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