दुनियाभर में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के चलते डिफेंस सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ का माहौल है। बड़े ऑर्डर बुक और सरकार के महत्वाकांक्षी एक्सपोर्ट लक्ष्यों के चलते इस सेक्टर पर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। Nifty India Defence Index साल की शुरुआत से अब तक करीब 19% उछल चुका है।
ग्लोबल खर्च डिफेंस सेक्टर को दे रहा बूस्ट
ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितताओं के कारण डिफेंस पर ग्लोबल खर्च 2026 तक बढ़कर $2.6 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इस ट्रेंड का सीधा फायदा भारत के डिफेंस इंडस्ट्री को मिल रहा है, जो घरेलू बजट बढ़ने और एक्सपोर्ट के अवसरों से फल-फूल रही है।
सेक्टर में बूम के बीच वैल्यूएशन में बड़ा अंतर
इस सेक्टर में आई तेजी के साथ ही कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशन (Valuation) भी काफी बढ़ गई है, जिससे प्रमुख कंपनियों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
- Bharat Electronics Limited (BEL): इसका P/E लगभग 65.1 है (कुछ अनुमानों में 76.9 तक), जो इसे 'Significantly Overvalued' की श्रेणी में रखता है।
- Astra Microwave Products: इसका P/E भी करीब 64.4x के आसपास है।
- Hindustan Aeronautics Limited (HAL): इसकी वैल्यूएशन थोड़ी बेहतर है, P/E लगभग 30.25 है।
- Zen Technologies: यह 45.12 के P/E के साथ बीच में है, जो इसके 3-साल के औसत के करीब है।
प्रमुख कंपनियां: ताकत और पोजीशन
- HAL: यह भारत की एकमात्र Tejas फाइटर जेट निर्माता है और इसके पास ₹62,370 करोड़ का बड़ा ऑर्डर है, जिसमें 97 LCA Mk-1A एयरक्राफ्ट शामिल हैं।
- BEL: डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स में यह लीडर है, जिसके पास मजबूत ऑर्डर इनफ्लो, डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो और कोई कर्ज नहीं है।
- Zen Technologies: 31 जनवरी 2026 तक इसके पास ₹1,427 करोड़ का ऑर्डर बुक था, जिसमें सिम्युलेटर और एंटी-ड्रोन सिस्टम शामिल हैं।
- Astra Microwave Products: यह महत्वपूर्ण माइक्रोवेव और RF कंपोनेंट्स सप्लाई करती है, लेकिन हाई वैल्यूएशन की चिंताएं बनी हुई हैं।
सरकारी नीतियां ग्रोथ को दे रही हैं गति
भारत का लक्ष्य 2027 तक अपनी डिफेंस जरूरतों का 75% घरेलू स्तर पर पूरा करना है और 2029 तक ₹50,000 करोड़ के डिफेंस एक्सपोर्ट का प्लान है। अप्रैल 2026 तक डिफेंस एक्सपोर्ट ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। DAP-2020 और iDEX जैसी सरकारी नीतियां इस ग्रोथ के प्रमुख चालक हैं।
एग्जीक्यूशन में बाधाएं और सप्लाई चेन की दिक्कतें
मजबूत ऑर्डर बुक के बावजूद, डिफेंस सेक्टर को एग्जीक्यूशन में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें सप्लाई चेन का विस्तार, कुशल कर्मचारियों की कमी और विशेष पार्ट्स के लिए इम्पोर्ट में देरी जैसी समस्याएं शामिल हैं। HAL के Tejas प्रोग्राम में इंजन सप्लाई की पिछली दिक्कतें इन कमजोरियों को दर्शाती हैं। Zen Technologies को भी सरकारी खरीद की टाइमिंग के कारण रेवेन्यू में देरी का सामना करना पड़ा है।
वैल्यूएशन रिस्क और सतर्क रुख
BEL और Astra Microwave जैसी कंपनियां हाई P/E पर ट्रेड कर रही हैं, जिसका मतलब है कि उनके स्टॉक की कीमतें पहले से ही भविष्य की ग्रोथ को दर्शा सकती हैं। HDFC सिक्योरिटीज ने HAL और अन्य पर 'Reduce' रेटिंग देकर वैल्यूएशन और एग्जीक्यूशन को लेकर चिंता जताई है।
भविष्य का प्रदर्शन एग्जीक्यूशन पर निर्भर
बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स को समय पर पूरा करना कंपनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा। Zen Technologies के FY27-28 के लिए ₹4,000 करोड़ के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों पर कड़ी नजर रहेगी। HAL का औसत 1-साल का प्राइस टारगेट करीब ₹5,527 है। BEL को अपने विभिन्न रेवेन्यू स्रोतों को बनाए रखना होगा, जबकि Zen Technologies की सफलता उसके लक्ष्यों को प्राप्त करने पर निर्भर करेगी। Astra Microwave को अपनी हाई वैल्यूएशन को लगातार प्रदर्शन से सही साबित करना होगा। कुल मिलाकर, ग्लोबल डिफेंस खर्च में वृद्धि के बीच सेक्टर का भविष्य मजबूत एग्जीक्यूशन, सप्लाई चेन की समस्याओं को दूर करने और हाई स्टॉक प्राइस को मैनेज करने पर टिका है।