रक्षा निर्यात ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, सेक्टर को मिली बड़ी मजबूती
भारतीय रक्षा निर्यात ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह आंकड़ा ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 62.66% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। यह उपलब्धि भारत के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां देश अब हथियारों का सिर्फ आयातक नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण निर्यातक भी बन रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि 2014 में जहां यह निर्यात सिर्फ ₹600 करोड़ के आसपास था, वहीं आज यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इस उछाल का मुख्य कारण सरकार की अनुकूल नीतियां और दुनियाभर में बढ़ती वैश्विक राजनीतिक तनाव हैं, जिसके चलते देशों का रक्षा खर्च बढ़ रहा है। यूनियन बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। इसमें पूंजीगत अधिग्रहण खर्च 24% बढ़कर ₹1.85 लाख करोड़ हो गया है, जिसमें से 75% राशि घरेलू निर्माताओं के लिए आरक्षित है।
निर्यात में इतनी तेजी क्यों?
इस शानदार प्रदर्शन के पीछे 'मेक इन इंडिया' पहल और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure) जैसी सरकारी नीतियों का अहम योगदान है। मार्च 2026 में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने ₹2.38 ट्रिलियन के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, जो घरेलू निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करती है। वहीं, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक रक्षा खर्च में वृद्धि हुई है, जिससे भारत को अपने रक्षा उत्पादों के लिए नए बाजार खोलने का मौका मिला है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) जैसी कंपनियों के पास 2034 तक के लिए ₹2,60,960 करोड़ का ऑर्डर बुक है। इसी तरह, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के पास ₹73,400 करोड़, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के पास ₹25,962 करोड़ और मझग़ांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के पास ₹27,415 करोड़ के बड़े ऑर्डर हैं। इन विशाल ऑर्डर बुक्स से कंपनियों को आने वाले सालों के लिए राजस्व का एक निश्चित अनुमान मिलता है और सेक्टर के विकास को बल मिलता है।
कंपनियों की वैल्यूएशन: बड़ी ग्रोथ या महंगी कीमतें?
रक्षा क्षेत्र में इस दमदार प्रदर्शन ने निवेशकों का ध्यान खींचा है, जिससे प्रमुख कंपनियों के शेयरों के वैल्यूएशन (Valuation) में भी उछाल आया है। अप्रैल 2026 की शुरुआत तक, HAL का पीई रेश्यो (P/E ratio) लगभग 27.6 से 34.3 के बीच था। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इससे भी ऊंचे मल्टीपल्स पर कारोबार कर रहा था, जिसका पीई रेश्यो करीब 49.0 से 54.5 था। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) का पीई रेश्यो सबसे ज्यादा 76.1 से 82.6 तक पहुंच गया था, जबकि मझग़ांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) का वैल्यूएशन 28.3 से 41.1 के आसपास था। ये ऊंचे पीई रेश्यो दर्शाते हैं कि निवेशक इन कंपनियों से भविष्य में भारी मुनाफा वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। यहां तक कि जब बाजार में गिरावट आई, तब भी रक्षा शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। मार्च 2026 में, निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स में व्यापक बाजार की उथल-पुथल के बावजूद 6% से अधिक की वृद्धि देखी गई। विश्लेषक इन शेयरों को खरीदने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें भारत में रक्षा उत्पादन और निर्यात में लंबी अवधि की वृद्धि दिख रही है। हालांकि, वे यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि मौजूदा शेयर की कीमतें शायद थोड़ी ज्यादा हो सकती हैं।
जोखिम जिन पर ध्यान देना जरूरी है
इतनी प्रभावशाली वृद्धि और मजबूत ऑर्डर बुक के बावजूद, कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देना जरूरी है। BDL और BEL जैसी कंपनियों के अत्यधिक उच्च पीई रेश्यो का मतलब है कि अगर उनकी मुनाफा वृद्धि उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो शेयरों में बड़ी गिरावट आ सकती है। आलोचकों का कहना है कि भारत का निर्यात अक्सर महंगे, पूर्ण विकसित सिस्टम के बजाय पुर्जों और कंपोनेंट्स पर अधिक केंद्रित होता है, जिससे शीर्ष वैश्विक निर्यातक बनने में बाधा आ सकती है। इसके अलावा, यह क्षेत्र सरकारी खर्च और निर्यात बाजारों पर बहुत अधिक निर्भर है, जिसका मतलब है कि वैश्विक राजनीति में बदलाव, सरकारी नीतियों में फेरबदल या बजट में कटौती से इसे नुकसान पहुंच सकता है। बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा न कर पाना भी मुनाफे को प्रभावित कर सकता है। जहाज निर्माण में अग्रणी MDL के प्राइस-टू-बुक (P/B) रेश्यो में भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह स्टॉक मार्केट के टॉप 10% शेयरों में से एक है और हाल ही में इसके शेयर भाव में ज्यादा हलचल नहीं दिखी है। लंबी ऑर्डर बुक राजस्व की दृश्यता देती है, लेकिन यह प्रोजेक्ट की लंबी समय-सीमा का भी संकेत है, जिससे लागत बढ़ने या तकनीक पुरानी होने का खतरा बढ़ जाता है।
आगे की राह: ग्रोथ जारी रहेगी, पर वैल्यूएशन पर नजर रखें
विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी फोकस, घरेलू उत्पादन और निर्यात अवसरों से प्रेरित होकर भारतीय रक्षा क्षेत्र में वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, निवेशकों को सतर्क रहने और शेयर की कीमतों में गिरावट का इंतजार करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि फिलहाल वैल्यूएशन काफी अधिक हैं। एक प्रमुख संकेतक यह देखना होगा कि डिफेंस एक्विजिशन के लिए स्वीकृत कितने प्रोजेक्ट्स (Acceptance of Necessity - AoN) वास्तव में वास्तविक ऑर्डर में तब्दील होते हैं। भारत का लक्ष्य 2029 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का है, जो इसे एक प्रमुख वैश्विक रक्षा निर्माता बनाने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।