भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट (Defense Export) साल 2029 तक ₹50,000 करोड़ के आंकड़े को छूने की उम्मीद है। स्वदेशी ड्रोन और मिसाइलों की बढ़ती ग्लोबल डिमांड इस ग्रोथ को बढ़ावा दे रही है। सरकारी पहलों से सेक्टर को सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन मौजूदा हाई वैल्यूएशन (Valuation) विदेशी कंपनियों के मुकाबले ज्यादा है, जो लिस्टेड डिफेंस कंपनियों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
डिफेंस एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड तोड़ उछाल!
भारत का डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (Defence Manufacturing Sector) एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2029 तक देश का डिफेंस एक्सपोर्ट ₹50,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। पिछले एक दशक में तो कमाल ही हो गया है, जहां साल 2014 में यह आंकड़ा सिर्फ ₹700 करोड़ था, वहीं 2026 तक इसके ₹38,400 करोड़ होने का अनुमान है। इस जबरदस्त ग्रोथ की मुख्य वजह भारतीय निर्मित Akash मिसाइल, Pinaka रॉकेट लॉन्चर और अलग-अलग तरह के लोइट्रिंग म्यूनिशन (Loitering Munitions) जैसे स्वदेशी डिफेंस सिस्टम की दुनिया भर में बढ़ती मांग है।
एक्सपोर्ट ग्रोथ के पीछे के कारण
'आत्मनिर्भर भारत' (Aatmanirbhar Bharat) के तहत स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग (Indigenous Manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए सरकार की नीतियां, जैसे कि डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 (Defence Acquisition Procedure 2020), और डोमेस्टिक खरीद (Domestic Procurement) को सक्रिय रूप से बढ़ावा देना, इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रही हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कुल डिफेंस खरीद में घरेलू ऑर्डर्स की हिस्सेदारी 2019 के 54% से बढ़कर अब 70% से ज्यादा हो गई है। खास बात यह है कि साल 2019 से 2024 के बीच भारतीय डिफेंस शिपमेंट का लगभग आधा हिस्सा अमेरिका को गया है। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) बदलावों के चलते भारतीय डिफेंस इक्विपमेंट (Defence Equipment) अब आर्मेनिया (Armenia) और यूरोप (Europe) जैसे नए बाजारों में भी अपनी पैठ बना रहे हैं।
ड्रोन का बढ़ता दबदबा और भविष्य की योजनाएं
आने वाले समय में अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (Unmanned Aerial Vehicles), यानी ड्रोन (Drones), इंडस्ट्री के लिए ग्रोथ का एक बड़ा जरिया बनने वाले हैं। अनुमान है कि 2029 तक ग्लोबल मिलिट्री ड्रोन मार्केट (Global Military Drone Market) में 20% सालाना की दर से ग्रोथ देखने को मिलेगी। भारत अगले दशक में ड्रोन टेक्नोलॉजी (Drone Technology) में $30 बिलियन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम (Counter-drone Systems) में $5 बिलियन तक का भारी निवेश करने की योजना बना रहा है। इस सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में Zen Technologies, ideaForge और Adani Defence शामिल हैं, जो इस तेजी से बढ़ते सेगमेंट में अपनी जगह बना रही हैं।
वैल्यूएशन की चिंता और सेक्टर का भविष्य
हालांकि, इंडस्ट्री का पाइपलाइन (Pipeline) काफी मजबूत है और 2021 से 2026 के बीच अप्रूवल (Acceptance of Necessity approvals) ₹9.3 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन मार्केट एनालिस्ट्स (Market Analysts) स्टॉक वैल्यूएशन (Stock Valuations) को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। भारतीय डिफेंस स्टॉक्स (Defence Stocks) फिलहाल अपने फॉरवर्ड अर्निंग्स (Forward Earnings) के मुकाबले औसतन 50 गुना पर ट्रेड कर रहे हैं, जो कि ग्लोबल पीयर्स (Global Peers) के 28 गुना के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह वैल्यूएशन गैप (Valuation Gap) बताता है कि भविष्य की ज्यादातर ग्रोथ की उम्मीदें पहले से ही शेयरों की कीमतों में शामिल हो चुकी हैं, जिससे किसी भी तरह की चूक या देरी के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि भले ही लॉन्ग-टर्म प्रोक्योरमेंट (Long-term Procurement) की विजिबिलिटी मजबूत हो - 2030 तक कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) ₹2.8 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है - कंपनियों के लिए असली फायदा बड़े और जटिल ऑर्डर्स को समय पर पूरा करने और डिफेंस सेक्टर में चल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा व प्राइसिंग प्रेशर (Pricing Pressure) को मैनेज करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगा। अगले कुछ सालों में असली मॉनिटर (Monitorables) यह होगा कि ऑर्डर्स को किस रफ्तार से पूरा किया जाता है और क्या डोमेस्टिक कंपनियां इंटरनेशनल कम्पटीटर्स (International Competitors) के मुकाबले अपने मार्जिन्स (Margins) को बनाए रख पाती हैं या नहीं।
