Shipbuilding Sector: भारत की जापान और दक्षिण कोरिया पर नजर, निवेश लाने के लिए बड़ी कूटनीतिक कोशिश

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AuthorNeha Patil|Published at:
Shipbuilding Sector: भारत की जापान और दक्षिण कोरिया पर नजर, निवेश लाने के लिए बड़ी कूटनीतिक कोशिश

भारत सरकार जापान और दक्षिण कोरिया में निवेश जुटाने के लिए एक उच्च-स्तरीय मिशन भेज रही है। सरकार ने **₹69,725 करोड़** का पैकेज तैयार किया है, लेकिन विदेशी कंपनियां भारत में बड़ा निवेश करने से पहले पक्के ऑर्डर्स की गारंटी मांग रही हैं।

बड़े निवेश का लक्ष्य

Ministry of Ports, Shipping and Waterways टोक्यो और सियोल में ग्लोबल शिपबिल्डिंग दिग्गजों को भारत की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। इसका मुख्य मकसद भारत को 2047 तक दुनिया के टॉप-10 शिपबिल्डिंग देशों में शामिल करना है। सरकार ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में पांच नए शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने की योजना बनाई है।

सरकार का भारी-भरकम पैकेज

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने ₹69,725 करोड़ का एक बड़ा सपोर्ट पैकेज पेश किया है। इसमें ₹25,000 करोड़ का 'Maritime Development Fund' और ₹24,736 करोड़ की 'Shipbuilding Financial Assistance Scheme' शामिल है। इसका उद्देश्य प्रोजेक्ट्स की लागत को कम करना और जोखिम को घटाना है।

असली चुनौती: 'ऑर्डर बुक' की गारंटी

सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और सब्सिडी देने को तैयार है, लेकिन पेंच विदेशी निवेश के 'कन्वर्जन' में फंसा है। जापान और दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनियां बिना किसी पक्के और लंबे समय के 'ऑर्डर बुक' के अरबों डॉलर का निवेश करने में हिचकिचा रही हैं। उनका साफ कहना है कि भारत में बनने वाले जहाजों के लिए खरीदार की गारंटी होनी चाहिए।

कंपनियों का बदलता रुख

पिछले कुछ घटनाक्रम इस जटिलता को दर्शाते हैं। उदाहरण के तौर पर, HD Hyundai का तमिलनाडु में $4 बिलियन का प्रोजेक्ट अभी डीपीआर स्टेज पर है, लेकिन Cochin Shipyard Limited और HD Korea Shipbuilding के बीच कोच्चि में ब्लॉक फैब्रिकेशन यूनिट का जॉइंट वेंचर रद्द हो गया है। अब दोनों कंपनियां केवल टेक्निकल सहयोग पर ध्यान दे रही हैं। वहीं, Mazagon Dock Shipbuilders भी जमीन की दिक्कतों के कारण अपने लोकेशन में बदलाव कर रही है।

निवेशकों के लिए, इन पांच समुद्री क्लस्टर्स पर नजर रखना जरूरी है। यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार आने वाले समय में कंपनियों को डिमांड की पक्की गारंटी देकर निवेश को अंतिम रूप दे पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.