Cold Chain Sector: सिर्फ गोदाम बनाने से बात नहीं बनेगी, अब 'क्षमता' पर जोर देने की तैयारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Cold Chain Sector: सिर्फ गोदाम बनाने से बात नहीं बनेगी, अब 'क्षमता' पर जोर देने की तैयारी

ASSOCHAM समिट में विशेषज्ञों ने साफ किया है कि भारत को अब कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स बढ़ाने के बजाय टेक्नोलॉजी और बेहतर कनेक्टिविटी पर ध्यान देने की जरूरत है। देश को हर साल **$18.5 अरब** के फूड वेस्ट का सामना करना पड़ता है, जिसे रोकने के लिए अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी को प्राथमिकता दी जा रही है।

कोल्ड चेन सेक्टर की ग्रोथ स्ट्रैटेजी में अब बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुई ASSOCHAM समिट में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल स्टोरेज क्षमता बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि ऑपरेशनल कैपेबिलिटी को बेहतर बनाना अनिवार्य है। देश में कोल्ड स्टोरेज की कैपेसिटी 4 करोड़ टन से अधिक होने के बावजूद, फसल कटाई के बाद होने वाले फूड वेस्ट का आंकड़ा $18.5 अरब पर अटका हुआ है। यह स्पष्ट करता है कि केवल नए वेयरहाउस बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि खेत से उपभोक्ता तक सप्लाई चेन को सुरक्षित करना होगा।

सेक्टर में सुधार की जरूरत

फिलहाल, देश का कोल्ड चेन मार्केट काफी बिखरा हुआ है और केवल 4% खराब होने वाला सामान ही संगठित कोल्ड चेन नेटवर्क से गुजरता है। 2031 तक कोल्ड स्टोरेज कैपेसिटी में 2.2% की धीमी सालाना दर से बढ़ोतरी का अनुमान है। ऐसे में सेक्टर का भविष्य अब मल्टी-टेंपरेचर और मल्टी-प्रोडक्ट सुविधाओं पर टिका है, जो टेक्नोलॉजी और स्टैंडर्ड प्रक्रियाओं का उपयोग कर सकें।

निवेशकों के लिए चुनौतियां

निवेशकों और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए कुछ मोर्चों पर सतर्क रहना जरूरी है:

  • एनर्जी कॉस्ट: बिजली का खर्च कुल ऑपरेशनल लागत का लगभग 10% है, जो मार्जिन पर दबाव बनाता है।
  • क्षेत्रीय असमानता: देश की 60% से ज्यादा कैपेसिटी केवल 10 राज्यों में सिमटी है, जिससे बाकी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की भारी कमी है।
  • स्किल गैप: रेफ्रिजरेशन इंजीनियरिंग और तापमान निगरानी के लिए कुशल मानव संसाधन की कमी प्रोजेक्ट्स के लिए एक बड़ा रिस्क है।

अब सरकारी मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क्स के साथ प्राइवेट निवेश को सिंक्रोनाइज करने की तैयारी है। State Bank of India जैसे बड़े लेंडर्स अब मशीनरी अपग्रेड, IoT-इनेबल्ड कंट्रोल सिस्टम और वर्किंग कैपिटल के लिए कस्टमाइज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स मुहैया करा रहे हैं। निवेशकों की नजर अब इस पर होनी चाहिए कि कितनी तेजी से कंपनियां असंगठित छोटे ऑपरेटर्स से हटकर फॉर्मल और इंटीग्रेटेड प्लेयर्स में तब्दील होती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.