भारत का बड़ा दांव: ग्रीन टेक की सुरक्षा के लिए अहम खनिजों का रिजर्व, चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत का बड़ा दांव: ग्रीन टेक की सुरक्षा के लिए अहम खनिजों का रिजर्व, चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी
Overview

भारत अपने ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सप्लाई में आने वाली रुकावटों से बचाने के लिए रेयर अर्थ, लिथियम और कोबाल्ट जैसे अहम खनिजों (critical minerals) का **छह महीने** का स्ट्रेटेजिक रिजर्व (strategic reserve) तैयार कर रहा है। यह कदम चीन के ग्लोबल सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ और भविष्य की टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग के बीच भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

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चीन के दबदबे को कम करने की कोशिश

इस स्ट्रेटेजिक रिजर्व का मुख्य उद्देश्य भारत के रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और मैन्युफैक्चरिंग जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर्स को सप्लाई के रिस्क और कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाना है। दरअसल, चीन दुनिया भर में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (rare earth elements) के माइनिंग (mining) का करीब 60% और प्रोसेसिंग (processing) का लगभग 90% हिस्सा कंट्रोल करता है। वैश्विक व्यापार विवादों के दौरान चीन द्वारा रेयर-अर्थ मैग्नेट एक्सपोर्ट पर लगाई गई अस्थायी पाबंदियों ने दुनिया को सप्लाई चेन की नाजुकता का अहसास कराया था। भारत अपनी एनर्जी ट्रांजिशन योजनाओं के लिए लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और कॉपर जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स के लिए भारी इंपोर्ट पर निर्भर है, और इनकी सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा भारत के औद्योगिक विकास और ऊर्जा लक्ष्यों को खतरे में डाल सकती है।

वैश्विक ट्रेंड के साथ भारत

भारत का यह कदम कोई अनोखी पहल नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है। अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया जैसे देश पहले से ही अपने सरकारी स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा स्टॉक रखते हैं। वहीं, जापान और यूरोपियन यूनियन (EU) भी नए सोर्स की तलाश और डोमेस्टिक प्रोसेसिंग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, ये मिनरल्स अक्सर तेल से भी ज्यादा वोलेटाइल (volatile) होते हैं, इसलिए इनका रणनीतिक रिजर्व बनाना एक समझदारी भरा आर्थिक फैसला माना जा रहा है। भारत की नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के तहत इस सेक्टर में अन्वेषण (exploration), खनन, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹16,300 करोड़ का फंड भी आवंटित किया गया है, ताकि इस सेक्टर में निवेश आकर्षित किया जा सके।

भारत के सामने चुनौतियां

अपनी नीतिगत मंशाओं और वैश्विक मिसालों के बावजूद, भारत को इस स्ट्रेटेजिक मिनरल रिजर्व को बनाने में कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। सबसे अहम चुनौती यह है कि लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे मिनरल्स का डोमेस्टिक प्रोडक्शन (domestic production) अभी अनुमानित मांग, खासकर FY30 तक की, के लिए बहुत कम है। घरेलू माइनिंग और रिफाइनिंग कैपेसिटी को बढ़ाना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें बड़ी कैपिटल इन्वेस्टमेंट, सख्त पर्यावरण नियम और जिओलॉजिकल (geological) दिक्कतें शामिल हैं। एक नया माइन शुरू करने और उसे उत्पादन लायक बनाने में 10 साल तक का समय लग सकता है। इसके उलट, चीन का स्थापित इंफ्रास्ट्रक्चर, एकीकृत सप्लाई चेन और कम लागत इसे एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाती है। इसके अलावा, छह महीने के रिजर्व को खरीदने, स्टोर करने और मैनेज करने का खर्च भी काफी ज्यादा होगा। हालांकि, लोहम क्लीनटेक (Lohum Cleantech) जैसी कंपनियां रीसाइक्लिंग और स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं, लेकिन ये प्रयास अभी देश की बड़ी इंपोर्ट निर्भरता को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा कदम

महत्वपूर्ण खनिजों के स्ट्रेटेजिक रिजर्व का निर्माण भारत के लिए महत्वपूर्ण उद्योगों में लंबी अवधि की सेल्फ-रिलायंस (self-reliance) का एक अहम हिस्सा है। जानकारों का मानना है कि यह रणनीति सप्लाई शॉक (supply shock) और भू-राजनीतिक दबाव (geopolitical pressure) को कम करने में मदद करेगी और चीन की दीर्घकालिक रणनीतियों का मुकाबला करेगी। इस रणनीति की सफलता के लिए लगातार सरकारी समर्थन, नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन का प्रभावी कार्यान्वयन, महत्वपूर्ण प्राइवेट और फॉरेन इन्वेस्टमेंट (foreign investment) को आकर्षित करना, और खानिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) जैसी संस्थाओं के माध्यम से विदेशी संपत्तियों (foreign assets) को सुरक्षित करना आवश्यक होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.