हॉरमूज नाकेबंदी का असर: LPG आवंटन में भारी बढ़ोतरी
होरमूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते तनाव और संघर्ष ने भारत के एलपीजी (LPG) आयात को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस संकट के जवाब में, भारत सरकार ने कमर्शियल एलपीजी आवंटन को बढ़ाकर संकट-पूर्व स्तर का 70% कर दिया है, जो मौजूदा 50% में 20% की सीधी बढ़ोतरी है। यह कदम मुख्य रूप से इस्पात (steel), ऑटोमोटिव, कपड़ा (textiles), डाई, रसायन (chemicals) और प्लास्टिक जैसे श्रम-गहन (labor-intensive) क्षेत्रों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए उठाया गया है। सरकार ने रिफाइनरियों को हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स जैसे प्रोपेन और ब्यूटेन को डायवर्ट करके एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने का निर्देश भी दिया है।
भारत की आयात पर निर्भरता और जोखिम
यह निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा (energy security) की नाजुक स्थिति और आयात पर भारी निर्भरता को उजागर करता है। भारत अपने एलपीजी का लगभग 60% आयात करता है, और इन आयातों का करीब 90% हिस्सा हॉरमूज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। early March 2026 से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में वाणिज्यिक यातायात बाधित होने के कारण, भारत के मार्च महीने के एलपीजी आयात में फरवरी की तुलना में 46% तक की गिरावट दर्ज की गई। 19 मार्च, 2026 को समाप्त सप्ताह में मध्य पूर्व से एलपीजी का प्रवाह घटकर कुल आयात का केवल 34% रह गया, जो January के बाद सबसे निचला स्तर है।
गहरे जोखिम और आर्थिक प्रभाव
होरमूज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है, जो दुनिया के लगभग 20% दैनिक तेल व्यापार और एलएनजी (LNG) की भारी मात्रा को प्रभावित कर रहा है, जिससे ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं। भारत के लिए, यह स्थिति ऊर्जा आयात के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) और रूस (Russia) जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख करने पर शिपिंग मार्ग लंबे और अधिक महंगे हो जाते हैं, जिससे भारत के वार्षिक आयात लागत में अरबों (billions) का इजाफा हो सकता है और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। एलपीजी की कीमतों में भी काफी अस्थिरता देखी गई है, मार्च 2026 में भारतीय कीमतें $1102 USD/MT तक पहुंच गई थीं। यह स्थिति व्यापार घाटे (trade deficit) को बढ़ाने और मुद्रास्फीति (inflationary pressures) के दबाव को और तेज कर सकती है।
भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा: विविधीकरण ही समाधान
भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए कच्चे माल के स्रोतों के भौगोलिक विविधीकरण (diversification) से आगे बढ़कर घरेलू स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा (renewables) में तेजी लाने की आवश्यकता है। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के माहौल में ऊर्जा क्षेत्र में लाभ मार्जिन पर सतर्कता बरतना जरूरी है। हालांकि, मौजूदा संकट मजबूत बुनियादी ढांचे, जैसे एलपीजी और एलएनजी भंडारण (storage) का विस्तार, और भविष्य के आपूर्ति झटकों के खिलाफ अधिक लचीलेपन के लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित करता है।