नियामक ढांचा (Regulatory Framework)
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के नए नियमों के तहत, CCTV कैमरों को कड़े 'आवश्यक आवश्यकताओं' (Essential Requirements - ER) को पूरा करना होगा। अप्रैल 2024 में लागू हुए इन नियमों के तहत, निर्माताओं को System-on-Chip (SoC) जैसे मुख्य कंपोनेंट्स के मूल देश को घोषित करना अनिवार्य होगा। साथ ही, अनधिकृत रिमोट एक्सेस की कमजोरियों की जांच के लिए मान्यता प्राप्त STQC लैब्स से टेस्ट पास करना होगा।
बाजार में बदलाव (Market Shift Dynamics)
यह सख्त सर्टिफिकेशन प्रक्रिया Hikvision और Dahua जैसी चीनी कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका है, जो पहले भारतीय बाज़ार में बड़ी हिस्सेदारी रखती थीं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों और चीनी चिपसेट का उपयोग करने वाले प्रोडक्ट्स को सर्टिफिकेशन नहीं दिया जा रहा है। इसका सीधा फायदा CP Plus, Prama, Matrix और Sparsh जैसी भारतीय कंपनियों को मिल रहा है। ये भारतीय कंपनियाँ पहले ही अपनी सप्लाई चेन को बदलकर ताइवानी चिपसेट और लोकल फर्मवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं।
मार्केट डेटा के मुताबिक, फरवरी तक भारतीय प्लेयर्स के पास बाज़ार की 80% से ज़्यादा हिस्सेदारी आ चुकी थी, जो पहले करीब एक-तिहाई थी। CP Plus की मार्केट लीडरशिप 20-25% से बढ़कर 45-50% तक पहुंच गई है। कुछ चीनी कंपनियाँ बाज़ार से पूरी तरह बाहर हो गई हैं, जबकि Hikvision जैसी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर बनाने और अपनी सप्लाई चेन को बदलने पर मजबूर होना पड़ा है।
लागत का असर (Cost Implications)
चीनी सप्लायर्स से दूरी बनाने और कंपोनेंट के मूल देश को बताने की अनिवार्यता से निर्माण लागत बढ़ रही है। विश्लेषकों का अनुमान है कि CCTV कैमरों के बिल ऑफ मटीरियल्स (BoM) में 15-20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। मेमोरी और प्रोसेसर की मौजूदा वैश्विक कमी के साथ मिलकर, यह अंतिम उत्पाद की कीमतों को भी बढ़ाएगा। हालांकि, लागत कम करने के लिए कुछ कंपनियाँ कंपोनेंट्स को लोकलाइज़ कर रही हैं, लेकिन कुल मिलाकर निगरानी उपकरणों का बाज़ार महंगा होने की उम्मीद है।