India ने Chinese CCTV Brands पर लगाई रोक, लोकल कंपनियों की चमकी किस्मत!

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AuthorMehul Desai|Published at:
India ने Chinese CCTV Brands पर लगाई रोक, लोकल कंपनियों की चमकी किस्मत!
Overview

**1 अप्रैल** से भारत में इंटरनेट से जुड़े CCTV कैमरों की बिक्री पर बड़ी रोक लगने जा रही है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि Hikvision और Dahua जैसी चीनी कंपनियों के प्रोडक्ट्स, खासकर जो चीनी चिपसेट का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अब सर्टिफिकेशन नहीं मिलेगा। इस फैसले से भारतीय कंपनियों जैसे CP Plus और Prama को बड़ा फायदा होने वाला है।

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नियामक ढांचा (Regulatory Framework)

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के नए नियमों के तहत, CCTV कैमरों को कड़े 'आवश्यक आवश्यकताओं' (Essential Requirements - ER) को पूरा करना होगा। अप्रैल 2024 में लागू हुए इन नियमों के तहत, निर्माताओं को System-on-Chip (SoC) जैसे मुख्य कंपोनेंट्स के मूल देश को घोषित करना अनिवार्य होगा। साथ ही, अनधिकृत रिमोट एक्सेस की कमजोरियों की जांच के लिए मान्यता प्राप्त STQC लैब्स से टेस्ट पास करना होगा।

बाजार में बदलाव (Market Shift Dynamics)

यह सख्त सर्टिफिकेशन प्रक्रिया Hikvision और Dahua जैसी चीनी कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका है, जो पहले भारतीय बाज़ार में बड़ी हिस्सेदारी रखती थीं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों और चीनी चिपसेट का उपयोग करने वाले प्रोडक्ट्स को सर्टिफिकेशन नहीं दिया जा रहा है। इसका सीधा फायदा CP Plus, Prama, Matrix और Sparsh जैसी भारतीय कंपनियों को मिल रहा है। ये भारतीय कंपनियाँ पहले ही अपनी सप्लाई चेन को बदलकर ताइवानी चिपसेट और लोकल फर्मवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं।

मार्केट डेटा के मुताबिक, फरवरी तक भारतीय प्लेयर्स के पास बाज़ार की 80% से ज़्यादा हिस्सेदारी आ चुकी थी, जो पहले करीब एक-तिहाई थी। CP Plus की मार्केट लीडरशिप 20-25% से बढ़कर 45-50% तक पहुंच गई है। कुछ चीनी कंपनियाँ बाज़ार से पूरी तरह बाहर हो गई हैं, जबकि Hikvision जैसी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर बनाने और अपनी सप्लाई चेन को बदलने पर मजबूर होना पड़ा है।

लागत का असर (Cost Implications)

चीनी सप्लायर्स से दूरी बनाने और कंपोनेंट के मूल देश को बताने की अनिवार्यता से निर्माण लागत बढ़ रही है। विश्लेषकों का अनुमान है कि CCTV कैमरों के बिल ऑफ मटीरियल्स (BoM) में 15-20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। मेमोरी और प्रोसेसर की मौजूदा वैश्विक कमी के साथ मिलकर, यह अंतिम उत्पाद की कीमतों को भी बढ़ाएगा। हालांकि, लागत कम करने के लिए कुछ कंपनियाँ कंपोनेंट्स को लोकलाइज़ कर रही हैं, लेकिन कुल मिलाकर निगरानी उपकरणों का बाज़ार महंगा होने की उम्मीद है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.