इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश
केंद्र सरकार ने 'इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (ECMS) के चौथे दौर के तहत कुल ₹7,100 करोड़ के निवेश को हरी झंडी दिखा दी है। इस योजना का मकसद भारत की सप्लाई चेन को मजबूत करना और उन हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स के निर्माण को बढ़ावा देना है, जिनका भारत वर्तमान में भारी आयात करता है।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी
इस मंजूरी में सबसे खास है भारत का पहला रेयर अर्थ मैग्नेट (Rare Earth Magnets) प्लांट, जिसके लिए बैटरी रीसाइक्लिंग फर्म Lohum Cleantech ₹700 करोड़ का निवेश उत्तर प्रदेश में करेगी। वहीं, Syrma SGS Technology को आंध्र प्रदेश में दो अहम प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी मिली है: एक ₹588 करोड़ का फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) यूनिट और दूसरा ₹385 करोड़ का लैमिनेट्स फैसिलिटी। इसके अलावा, Dixon Technologies उत्तर प्रदेश में ₹1,100 करोड़ का डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट शुरू करेगी, और VVDN Technologies हरियाणा में ₹50 करोड़ का हीट सिंक यूनिट स्थापित करेगी।
आत्मनिर्भरता की ओर एक रणनीतिक छलांग
इन स्वीकृत प्रोजेक्ट्स से ₹85,515 करोड़ के उत्पादन की उम्मीद है। यह पहल 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम को और मजबूत करती है और मोबाइल असेंबली में PLI-संचालित विकास को पूरा करती है, जिससे कंपोनेंट इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण गैप्स भरे जाएंगे। ये कंपोनेंट्स इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस जैसे अहम सेक्टर्स के लिए बेहद जरूरी हैं।
मंत्री की डिजाइन क्षमता पर चेतावनी
यूनियन मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने उद्योग जगत को आगाह किया है कि यदि कंपोनेंट PLI स्कीम के तहत प्रगति धीमी रही, तो अप्रूवल्स और भुगतान पर सीमाएं लगाई जा सकती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कंपनियों को अपनी इन-हाउस डिजाइन क्षमताओं (Design Capabilities) को मजबूत करना होगा, वरना वे इस रेस से बाहर हो सकती हैं।
स्कीम के माइलस्टोन्स
इस चौथे दौर के साथ, ECMS स्कीम के तहत कुल स्वीकृत निवेश बढ़कर ₹61,671 करोड़ हो गया है। सभी दौरों से अनुमानित कुल उत्पादन ₹4.51 लाख करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है, जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग लैंडस्केप को बदलने की स्कीम की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।