मेक इन इंडिया को बड़ा बूस्ट
सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को $500 अरब तक पहुंचाना है, जो वित्त वर्ष 25 में $125 अरब था। इन स्वीकृत प्रोजेक्ट्स में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर जैसे अहम सेक्टर्स शामिल हैं।
प्रमुख प्रोजेक्ट्स और निवेश
मंजूर किए गए प्रोजेक्ट्स में, Dixon Technologies डिस्प्ले मॉड्यूल का निर्माण करेगी, वहीं Lohum Cleantech रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने के लिए मंजूरी पा चुकी है। Dixon Technologies का मार्केट कैप लगभग ₹627.14 अरब है, जबकि Lohum Cleantech बैटरी रीसाइक्लिंग और क्रिटिकल मिनरल्स में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर उभर रही है।
ग्लोबल रेस और महत्वाकांक्षी लक्ष्य
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्य काफी महत्वाकांक्षी हैं। चीन अपने 'मेड इन चाइना 2025' इनिशिएटिव के तहत 2026 तक अपने इलेक्ट्रॉनिक इन्फॉर्मेशन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 7% सालाना ग्रोथ का लक्ष्य रख रहा है। वियतनाम भी तेजी से मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है, जिसका लक्ष्य 2025 तक हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में $160 अरब तक पहुंचना है। भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है, के लिए यह कदम गेम-चेंजर साबित हो सकता है, हालांकि मोबाइल फोन अभी भी कुल उत्पादन मूल्य का 44% है।
चुनौतियाँ और वैल्यू चेन में ऊपर बढ़ना
इन 29 प्रोजेक्ट्स की मंजूरी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन योजनाओं के अमल और वैश्विक वैल्यू चेन में ऊपर चढ़ने में चुनौतियां अभी भी बाकी हैं। भारत की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स ने उत्पादन बढ़ाने में मदद की है, लेकिन इंसेंटिव के समय पर भुगतान और सिर्फ असेंबली पर निर्भरता को लेकर आलोचनाएं भी हुई हैं। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स को चेताया है कि यदि वे स्वदेशी डिजाइन क्षमताओं को प्राथमिकता नहीं देते हैं, तो फंडिंग रोकी जा सकती है। यह पॉलिसी शिफ्ट वॉल्यूम से वैल्यू की ओर इशारा करता है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं सप्लाई चेन को बाधित कर सकती हैं और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ा सकती हैं।
निर्भरता और वैश्विक अस्थिरता के जोखिम
लगातार ग्रोथ के लिए कई फैक्टर जोखिम पैदा कर रहे हैं। PLI स्कीम्स के तहत विदेशी फर्मों पर निर्भरता घरेलू खिलाड़ियों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर सवाल उठाती है। Lohum Cleantech जैसी कंपनियां क्रिटिकल मिनरल्स पर फोकस कर रही हैं, लेकिन उनकी स्केलिंग एफिशिएंसी पर भी नजर रखी जा रही है। FY31 तक $500 अरब के लक्ष्य के लिए लगातार निवेश और एक स्थिर वैश्विक माहौल की जरूरत होगी। हालांकि, वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार खतरे बने हुए हैं। कई प्रोडक्ट कैटेगरी के लिए आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भरता का मतलब है कि बाहरी झटके घरेलू उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।