भारतीय सरकार कंसल्टिंग, ऑडिट, कंप्लायंस और एनवायर्नमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ESG) सर्विसेज में स्पेशलाइज्ड स्वदेशी मल्टी-सर्विस डिलीवरी फर्म्स को बढ़ावा देने के लिए स्ट्रेटेजीज़ पर एक्टिवली विचार कर रही है। मुख्य उद्देश्य विदेशी मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन्स (MNCs) पर निर्भरता कम करना और भारत के विशाल टैलेंट पूल का इस्तेमाल करके 'बिग फोर' (Ernst & Young, KPMG, Deloitte, और PricewaterhouseCoopers) जैसे ग्लोबल दिग्गजों को टक्कर दे सकने वाली डोमेस्टिक कंपनियों को नर्चर करना है। भारत का सर्विस सेक्टर, खासकर प्रोफेशनल, साइंटिफिक और टेक्निकल सर्विसेज, बड़ी संख्या में इंग्लिश बोलने वाले, टेक्निकली प्रोफिशिएंट और किफायती वेतन पर मिलने वाले प्रोफेशनल्स की वजह से काफी बढ़ा है। हालांकि, यह टैलेंट पूल ज्यादातर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के माध्यम से फॉरेन MNCs की सेवा कर रहा है, न कि भारतीय एंटरप्राइजेज को पावर दे रहा है।
भारत सर्विस एक्सपोर्ट का एक बड़ा हब होने के बावजूद, डोमेस्टिक प्रोफेशनल सर्विसेज मार्केट काफी फ्रेंगमेंटेड है। रजिस्टर्ड फर्म्स में से ज्यादातर छोटी प्रोप्राइटरशिप्स हैं, और मल्टीडिसिप्लिनरी पार्टनरशिप्स व एडवरटाइजिंग पर रेगुलेटरी रिस्ट्रिक्शन्स भारतीय फर्म्स के स्केल और कॉम्पिटिटिव एबिलिटी को और लिमिट करते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उदय भी एक नया डायनामिक पेश करता है, जहां AI रूटीन टास्क को हैंडल कर सकती है, हालांकि कॉम्प्लेक्स स्ट्रैटेजिक डिसीजन-मेकिंग के लिए ह्यूमन एक्सपर्टाइज अभी भी क्रिटिकल है। ग्लोबली कॉम्पिटिटिव फर्म्स बनाने के लिए, भारत को एडवांस्ड प्रॉब्लम-सॉल्विंग और क्रिटिकल थिंकिंग में स्किल्ड प्रोफेशनल्स डेवलप करने पर फोकस करना होगा।
इस इनिशिएटिव में भारत के इकोनॉमिक ग्रोथ को बूस्ट करने, प्रोफेशनल सर्विसेज में इसकी ग्लोबल स्टैंडिंग को बेहतर बनाने, हाई-वैल्यू जॉब्स बनाने और इनोवेशन को प्रमोट करने की काफी क्षमता है। इससे इस सेक्टर में इंडियन मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन्स का उदय हो सकता है। हालांकि, रेगुलेटरी बैरियर्स को पार करना, डोमेस्टिक फर्म्स को स्केल करना और AI जैसी टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट्स को अपनाना सफलता के लिए क्रूशियल होगा। रेटिंग: 8/10