AC कंपनियों पर LPG का साया: प्रोडक्शन थमा, ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा बड़ा बोझ

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
AC कंपनियों पर LPG का साया: प्रोडक्शन थमा, ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा बड़ा बोझ
Overview

भारतीय एयर कंडीशनर (AC) बनाने वाली कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। Liquefied Petroleum Gas (LPG) की गंभीर किल्लत के चलते इन कंपनियों के प्रोडक्शन पर सीधा असर पड़ रहा है। सरकार की ओर से घरेलू LPG सप्लाई को प्राथमिकता देने की वजह से कमर्शियल यूजर्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते कंपनियों को महंगे विकल्प अपनाने और ग्राहकों पर कीमत बढ़ाने का बोझ डालने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

प्रोडक्शन पर असर: हीट एक्सचेंजर ब्रेजिंग में समस्या

AC के प्रोडक्शन में हीट एक्सचेंजर ब्रेजिंग (heat exchanger brazing) एक अहम प्रक्रिया है, जिसमें LPG सबसे कारगर तरीका माना जाता है। लेकिन, सरकारी नीतियों के तहत घरेलू LPG सप्लाई को प्राथमिकता मिलने के कारण कंपनियों को पर्याप्त मात्रा में LPG नहीं मिल पा रही है। इस वजह से कंपनियों को प्रोडक्शन जारी रखने के लिए महंगे और वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है।

महंगे विकल्प और सप्लाई चेन का रिस्क

प्रोडक्शन लाइन चालू रखने के लिए बड़े मैन्युफैक्चरर्स अब ब्रेजिंग के लिए ऑक्सी-एसिटिलीन (oxy-acetylene) का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, इस वैकल्पिक ईंधन की सप्लाई भी जोखिमों से भरी है, क्योंकि यह क्रूड ऑयल या चूना पत्थर (limestone) पर निर्भर करता है। Nuvama की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने चूना पत्थर का 94% आयात मध्य पूर्व (Middle East) से करता है, जिससे सप्लाई चेन का एक और बड़ा रिस्क जुड़ जाता है।

कीमतें बढ़ेंगी, मार्जिन पर दबाव

ईंधन की सप्लाई की इन मुश्किलों के चलते पहले से चल रहे दबावों में और बढ़ोतरी हो गई है। उत्तरी भारत में बेमौसम बारिश ने पिछले साल की धीमी गर्मी के बाद कंज्यूमर डिमांड को पहले ही प्रभावित किया था। बढ़ती इनपुट कॉस्ट से निपटने के लिए, कंपनियां अब रिटेल कीमतों में 5% से 10% तक की बढ़ोतरी कर रही हैं।

LG Electronics India की बढ़ाईं कीमतें

LG Electronics India ने रूम एयर कंडीशनर (RAC) की कीमतों में 10% का इजाफा किया है, जबकि अन्य प्रोडक्ट कैटेगरी में 5% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह बढ़ोतरी 2026 की शुरुआत से RAC पर पहले ही किए गए 9-10% के इजाफे के बाद आई है। लागत में बढ़ोतरी और नए, कड़े स्टार रेटिंग रेगुलेशन के मिले-जुले असर के कारण कुल मूल्य वृद्धि अब 8% से 14% के बीच हो सकती है।

EMS कंपनियों के लिए चुनौती

हालांकि कंपनियां उम्मीद कर रही हैं कि 2026 के फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही में रेवेन्यू में मामूली बढ़ोतरी होगी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) प्रोवाइडर्स के लिए रेवेन्यू और प्रॉफिट मार्जिन दोनों पर बड़ा चैलेंज है। ऑक्सी-एसिटिलीन का इस्तेमाल प्रोडक्शन को जारी तो रखता है, लेकिन इसकी लागत काफी ज्यादा है, जो सीधे तौर पर उन कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल रही है जो इस बढ़ी हुई लागत को सोख नहीं पा रही हैं।

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