नतीजों पर गिरी लागत की गाज: Igarashi Motors का मुनाफा क्यों घटा?
Igarashi Motors India Limited के लिए यह तिमाही (Q3 FY26) थोड़ी मुश्किल भरी रही। जहाँ एक तरफ कंपनी अपने ऑपरेशन्स से होने वाली कमाई (रेवेन्यू) में 2.5% की बढ़ोतरी दर्ज करके ₹216.09 करोड़ तक पहुँचने में कामयाब रही, वहीं दूसरी तरफ खर्चों के बढ़ जाने के कारण कंपनी का मुनाफा 32% लुढ़क गया। नतीजतन, कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) घटकर सिर्फ ₹3.50 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹5.16 करोड़ था।
प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) की हालत तो और भी खराब दिखी, जिसमें 41% की भारी गिरावट आई और यह ₹4.22 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल ₹7.16 करोड़ था। इसी के साथ, शेयर होल्डर्स के लिए प्रति शेयर आय (EPS) भी ₹1.64 से घटकर ₹1.11 रह गई।
9 महीने के आंकड़े भी चिंताजनक
अगर पिछले 9 महीनों (Nine Months FY26) के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो भी तस्वीर कुछ खास बेहतर नहीं है। रेवेन्यू में 1.4% की गिरावट के साथ यह ₹639.95 करोड़ रहा, जबकि PAT में तो 50% की भारी कटौती देखने को मिली और यह ₹105.52 करोड़ से लुढ़ककर ₹211.07 करोड़ पर आ गया।
बढ़े हुए खर्चों का पूरा हिसाब
इस मुनाफे में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कंपनी के कुल खर्चों (Total Expenses) में हुई बढ़ोतरी है। ये खर्च पिछले साल के ₹204.02 करोड़ से बढ़कर ₹211.96 करोड़ हो गए। इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात 'अनअलोकेबल खर्चों' (Unallocable Expenses) का बढ़ना है, खासकर कर्मचारी लाभ (Employee Benefits) और अन्य खर्चों के मद में। कंपनी ने बताया है कि नए लेबर कोड (Labour Codes) लागू होने के कारण कर्मचारी लाभ पर ₹0.72 करोड़ (यानी 71.95 लाख रुपये) का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
सेगमेंट की मिली-जुली तस्वीर
कंपनी के ऑटोमोटिव सेगमेंट ने अच्छी रफ्तार पकड़ी है और इसका रेवेन्यू 9.2% बढ़कर ₹194.31 करोड़ हो गया है। लेकिन, नॉन-ऑटोमोटिव सेगमेंट का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जहाँ रेवेन्यू में 33.7% की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह ₹21.78 करोड़ तक सिमट गया। इसी मिले-जुले प्रदर्शन और बढ़ते खर्चों ने कंपनी के कुल मुनाफे पर दबाव बनाया है।
आगे क्या?
फिलहाल, कंपनी की ओर से भविष्य को लेकर कोई खास गाइडेंस नहीं आई है। ऐसे में, बढ़ते हुए अनअलोकेबल खर्चे, खास तौर पर कर्मचारी लाभ से जुड़े, कंपनी के मार्जिन पर आगे भी दबाव बना सकते हैं। इन्वेस्टर्स अब इस बात पर नज़र रखेंगे कि कंपनी इन खर्चों को कैसे नियंत्रित करती है और आने वाली तिमाहियों में रेवेन्यू ग्रोथ को मुनाफे में कैसे तब्दील कर पाती है।