सौदे में क्यों हुई देरी?
यह अधिग्रहण, जिसकी पहली सहमति पिछले साल 31 मार्च को बनी थी, लीज ट्रांसफर और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) जैसे नियामकों से मंजूरी जैसे कुछ कानूनी और प्रक्रियात्मक पेचों के कारण अटक गया था। सूत्रों का कहना है कि Century Pulp and Paper के संचालन से जुड़ी आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट (Aditya Birla Real Estate) से लीज ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ITC अब इस सौदे को जल्द से जल्द निपटाने की उम्मीद कर रहा है।
कैपेसिटी में बंपर बढ़ोतरी
Century Pulp and Paper की मौजूदा फैसिलिटीज सालाना लगभग 5 लाख टन (500,000 tonnes) पेपर बनाने की क्षमता रखती हैं। इन ऑपरेशंस को ITC के मौजूदा सिस्टम में मिलाने से कंपनी की कुल पेपर मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी में करीब 50% का इजाफा होगा। इससे ITC की सालाना उत्पादन क्षमता 15 लाख टन (1.5 million tonnes) से ऊपर पहुंच जाएगी। यह विस्तार ITC के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता का लगभग 40% हिस्सा खुद के इस्तेमाल के लिए रखती है।
मार्केट पर पकड़ होगी और मजबूत
इस अधिग्रहण से भारत की सबसे बड़ी पेपर मैन्युफैक्चरर ITC की मार्केट पर पकड़ और भी मजबूत होगी। यह डील भारतीय पेपर इंडस्ट्री में चल रहे कंसॉलिडेशन (consolidation) को भी दर्शाती है, जहाँ बड़ी कंपनियाँ अपनी पहुँच बढ़ाने और वर्टिकल इंटीग्रेशन (vertical integration) को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं। फिलहाल ITC के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चार पेपर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हैं।
