ITC ने मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं का विस्तार करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए **₹20,000 करोड़** के निवेश की योजना का ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करना और निर्यात बढ़ाना है।
Detailed Coverage
ITC का मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा दांव
ITC लिमिटेड ने मीडियम-टर्म में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं बढ़ाने और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए ₹20,000 करोड़ के कैपिटल स्पेंडिंग प्लान की घोषणा की है। यह निवेश कंपनी की उस बड़ी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है जिसका मकसद भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सपोर्ट करना और एक्सपोर्ट मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाना है। यह कदम हाल ही में आठ नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के चालू होने के बाद आया है, जिससे कंपनी अपने 300 से ज़्यादा मौजूदा फैसिलिटी के नेटवर्क का और विस्तार कर रही है।
ऑपरेशंस और कैपेसिटी में विस्तार
नए कैपिटल स्पेंड से ITC के डाइवर्सिफाइड बिजनेस पोर्टफोलियो में ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ने की उम्मीद है। छह और प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, ऐसे में कंपनी विभिन्न सेगमेंट्स के लिए डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बूस्ट करने पर फोकस कर रही है। इस स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा Century Pulp and Paper के प्रस्तावित अधिग्रहण को भी माना जा रहा है। इसके ज़रिए कंपनी अपनी पेपरबोर्ड प्रोडक्शन कैपेसिटी को 50% से ज़्यादा बढ़ाकर 1.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रखती है। इस कदम से पेपर और पेपरबोर्ड मार्केट में ITC की पोजीशन और मजबूत होगी।
आयात पर निर्भरता घटाने पर फोकस
इस बड़े निवेश का एक मुख्य उद्देश्य आयात पर निर्भरता को कम करना है। ITC पल्प, डेकोर पेपर और स्पेशलाइज्ड कैप्सूल जैसे मटेरियल्स के लिए डोमेस्टिक सप्लाई चेन विकसित करने को प्राथमिकता दे रही है। कंपनी का अनुमान है कि मैन्युफैक्चरिंग के इन इनिशिएटिव्स से अगले दशक में फॉरेन एक्सचेंज कॉस्ट में ₹17,500 करोड़ से ज़्यादा की बचत हो सकती है। इन अहम मटेरियल्स का प्रोडक्शन लोकल लेवल पर करके, कंपनी ग्लोबल सप्लाई चेन की संभावित बाधाओं और करेंसी के उतार-चढ़ाव से अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित करना चाहती है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और शेयरहोल्डर रिटर्न
पिछले पांच सालों में ITC ने लगातार ग्रोथ दिखाई है। नेट सेगमेंट रेवेन्यू में 10.7% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया गया है, जो ₹83,300 करोड़ के पार चला गया है। कंपनी के नॉन-सिगरेट बिजनेस अब कुल सेगमेंट रेवेन्यू का लगभग दो-तिहाई हिस्सा कंट्रीब्यूट करते हैं, जो एक डाइवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल की ओर बदलाव को दर्शाता है। इस इंटेंसिव कैपिटल स्पेंडिंग के बावजूद, कंपनी ने शेयरहोल्डर्स को रिटर्न देने का अपना रिकॉर्ड बरकरार रखा है, पिछले पांच सालों में लगभग ₹85,000 करोड़ का डिविडेंड बांटा है।
जोखिम और आगे क्या?
जहां यह एक्सपेंशन लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, वहीं निवेशकों की नज़र इस बात पर रहेगी कि यह बड़ा कैपिटल स्पेंड नियर-टर्म में कंपनी के कैश फ्लो को कैसे प्रभावित करता है। इन प्रोजेक्ट्स की सफलता कुशल एग्जीक्यूशन पर निर्भर करेगी ताकि कॉस्ट में बढ़ोतरी या देरी से बचा जा सके। इसके अलावा, जैसे-जैसे कंपनी पल्प प्रोडक्शन जैसे अधिक कैपिटल-इंटेंसिव एरियाज में कदम रख रही है, कंपटीटिव मार्केट में प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना एक अहम फोकस रहेगा। Century Pulp and Paper अधिग्रहण की प्रगति और छह चल रहे प्रोजेक्ट्स के कमिशनिंग टाइमलाइन पर आगे की अपडेट्स मिलने की उम्मीद है।
